दिल्ली SIR ड्राफ्ट रोल: 68 विधानसभाओं में हटे मतदाताओं की संख्या जीत के अंतर से ज्यादा
नई दिल्ली । डेस्क: दिल्ली में हाल ही में हुए विशेष गहन संशोधन (SIR) के बाद जारी ड्राफ्ट मतदाता सूची पर एक रिपोर्ट ने नए विवाद को जन्म दे दिया है. 'वोटर अधिकार मंच' और 'सबर इंस्टीट्यूट' की ओर से जारी रिपोर्ट के अनुसार, ड्राफ्ट रोल में बाहर किए गए मतदाताओं की संख्या दिल्ली की 70 में से 68 विधानसभा सीटों पर 2025 के चुनाव में रहे जीत के अंतर से भी अधिक है.
आंकड़ों के मुताबिक, एसआईआर प्रक्रिया के दौरान 47 लाख से अधिक मतदाताओं को अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत या डुप्लीकेट (ASDD) के रूप में चिह्नित किया गया है, जो कि कुल आधार का लगभग 32.8 प्रतिशत यानी हर तीसरा मतदाता है.
रिपोर्ट में खुलासा किया गया है कि जून 2026 में एसआईआर शुरू होने से पहले ही जनवरी 2025 से जून 2026 के बीच 11 लाख से अधिक नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए थे. इनमें से सबसे अधिक 3.39 लाख से ज्यादा नाम अकेले अप्रैल 2026 में हटाए गए.
तुगलकाबाद, ओखला और आर. के. पुरम जैसी 10 से अधिक विधानसभाओं में मतदाताओं को सूची से बाहर करने की दर 40 प्रतिशत से भी अधिक रही. इसके अलावा, तृतीय-लिंग (थर्ड जेंडर) मतदाताओं में भी 45.5 प्रतिशत की भारी कटौती देखी गई है.
मंगलपुरी ब्लॉक वाइ में स्वयंसेवकों द्वारा किए गए डोर-टू-डोर सत्यापन में भी बड़ी गड़बड़ियां सामने आईं, जहां सैकड़ों लोग अपने पते पर मौजूद होने के बावजूद या तो एएसडीडी सूची में डाल दिए गए थे या फिर ड्राफ्ट रोल से ही गायब पाए गए.
इस मुद्दे पर आयोजित जनसुनवाई में सामाजिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव और अंजलि भारद्वाज ने चुनावी प्रक्रिया और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं. मंच ने मांग की है कि दिल्ली में इस एसआईआर प्रक्रिया को तुरंत वापस लिया जाए, गलत तरीके से हटाए गए नामों को बहाल किया जाए और हर व्यक्ति को सुनवाई का उचित अवसर दिया जाए.