डेल्सी रोड्रीगुएज ने अमरीका के सामने घुटने टेक दिये
त्वरित टिप्पणी- जेके कर
जिस वेनेजुएला ने कभी पूर्व राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के नेतृत्व में अपने तेल के कुओं का राष्ट्रीयकरण कर देश की संप्रभुता और आत्मनिर्भरता का परचम लहराया था, आज उसी देश ने वैश्विक ताकतों के आगे पूरी तरह समर्पण कर दिया है. मादुरो के अमरीकी विशेष बलों द्वारा अपहरण और बेदखली के बाद सत्ता में आईं अंतरिम राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रीगुएज ने अमरीका से मुकाबला करने के बजाय घुटने टेकने का बेहद सरल और आत्मघाती रास्ता चुन लिया है. डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के भारी दबाव के आगे झुकते हुए वेनेजुएला की नई सरकार ने अपने सबसे बड़े प्राकृतिक खजाने यानी तेल के संसाधनों की चाबी सीधे वाशिंगटन को सौंप दी है.
65 बिलियन बैरल तेल पर अमरीकी कब्जा और 25 साल का समझौता
इस विवादास्पद समझौते के तहत वेनेजुएला अपने 65 बिलियन बैरल तेल के विशाल भंडार के अधिकार अमरीका को सौंप रहा है. अगले 25 वर्षों तक चलने वाले इस प्रोजेक्ट के तहत अमरीकी और विदेशी कंपनियां वेनेजुएला के 17 रणनीतिक तेल क्षेत्रों में उतरेंगी और रोजाना लगभग 1.5 मिलियन बैरल तेल का दोहन करेंगी. इसके अतिरिक्त आठ नए 'ग्रीनफील्ड' तेल ब्लॉकों के विकास की आड़ में देश के संपूर्ण ऊर्जा क्षेत्र पर वाशिंगटन की पकड़ मजबूत की जा रही है. शेवरॉन जैसी अमरीकी तेल दिग्गजों को नए अन्वेषण और उत्पादन के अधिकार देने की तैयारियां अंतिम चरण में हैं. हालांकि, डेल्सी रोड्रीगुएज इसे राष्ट्रीय संप्रभुता की रक्षा और आर्थिक सुधार का नाम देकर अपनी टेलीविजन वार्ताओं में सही ठहराने की नाकाम कोशिश कर रही हैं.
वेनेजुएला की खोई पहचान और मादुरो की चुप्पी
भले ही प्रति बैरल 19 डॉलर मिलने के दावे से कराकस को अरबों डॉलर के राजस्व का सपना दिखाया जा रहा हो, लेकिन इस सौदे ने वेनेजुएला की उस ऐतिहासिक पहचान को मिटा दिया है जिसके लिए वह जाना जाता था. सत्ता में बने रहने के लिए रोड्रईगुएज ने देश की बुनियादी सोच और स्वाभिमान का सौदा कर लिया है. बेहद दुखद स्थिति यह है कि जिस निकोलस मादुरो की सहयोगी रहकर रोड्रीगुएज ने राजनीति सीखी, आज उनकी रिहाई या न्याय को लेकर इस सरकार के मुंह से एक शब्द भी नहीं निकल रहा है. एक समय जो वेनेजुएला अमरीका की साम्राज्यवादी नीतियों की आंखों में आंखें डालकर खड़ा रहता था, आज वह वाशिंगटन का महज एक पिछलगू बनकर रह गया है.
क्यूबा पर गहराता ऊर्जा संकट और सहयोगी देशों को झटका
इस पाला बदल का खमियाजा अब वेनेजुएला के पुराने सहयोगियों को भी भुगतना पड़ रहा है. एक दौर था जब वेनेजुएला अपनी संप्रभुता का इस्तेमाल करते हुए क्यूबा जैसे देशों को रियायती दरों पर तेल देकर मदद करता था. रोड्रीगुएज के अमरीका के सामने पूरी तरह नतमस्तक हो जाने के बाद यह मदद पूरी तरह ठप्प हो चुकी है, जिससे क्यूबा में एक भयानक ऊर्जा और आर्थिक संकट खड़ा हो गया है. कभी मादुरो के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलने वाली रोड्रीगुएज का यह रुख दर्शाता है कि उन्होंने अमरीकी दबाव के आगे अपनी विचारधारा को पूरी तरह तिलांजलि दे दी है और अब उनसे देश के सम्मान की रक्षा की कोई उम्मीद बाकी नहीं बची है.