कांगेर नेशनल पार्क में हिरण का शिकार, तीर से मारा गया
कांगेर नेशनल पार्क में तीर से हिरण का शिकार
बस्तर | संवाददाताः छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में स्थित कांगेर वैली नेशनल पार्क में एक बार फिर हिरण का शिकार हुआ है. गुरुवार की शाम को पार्क के पैदावाड़ा चौक के पास नेशनल हाईवे- 30 में तीर लगा हुआ घायल हिरण दौड़ते हुए पहुंचा और गिर गया.
वन विभाग के कर्मचारी और राहगीरों ने गंभीर रूप से घायल हिरण को उठाकर सड़क के किनारे ले गए. अस्पताल ले जाने से पहले ही घायल हिरण ने दम तोड़ दिया.
शुक्रवार को हिरण का पोस्टमार्टम कर विधिवत अंतिम संस्कार किया गया.
कांकेर वैली नेशनल पार्क के एसडीओ कमल तिवारी का कहना है कि शिकारी की तलाश की जा रही है. इसके लिए पार्क के भीतर लगे ट्रैप कैमरे की मदद ली जा रही है. साथ ही सुराग देने वालों को 10 हजार रुपये का इनाम देने की घोषणा भी की है.
गौरतलब है कि महीने भर पहले भी नेशनल पार्क में शिकारी हिरण का शिकार कर उसका मांस पकाने की तैयारी में थे.
मुखबिर से सूचना मिलने के बाद तुरंत वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और तीन शिकारियों को धर दबोचा.
शिकारियों के पास से हिरण का कच्चा मांस बरामद हुआ था.
पिछले दो महीनों में यह दूसरी घटना है, जब नेशनल पार्क के अंदर हिरण का शिकार किया गया है.
सामूहिक शपथ का नहीं हुआ असर
नेशनल पार्क प्रबंधन के द्वारा 2 साल पहले पार्क के अंतर्गत आने वाले ग्रामीण क्षेत्रों में शिकार बंद करने के लिए सामूहिक रूप से ग्रामीणों को शपथ दिलाई गई थी.
इसके बाद ग्रामीणों ने तीर धनुष वन विभाग को सुपुर्द कर दिया था.
इसके बाद नेशनल पार्क के संचालक ने दावा किया था कि नेशनल पार्क में जंगली जानवरों और वन्य पशुओं का शिकार पूरी तरह से बंद हो गया है.
गुरुवार को तीर लगने से लहूलुहान हुए हिरण को देखने के बाद इस सुरक्षा के दावे की पोल खुल गई.
3 से 7 साल की सजा का प्रावधान
चीतल का शिकार करने पर वन्य जीव प्राणी अधिनियम के तहत 3 से लेकर 7 साल तक की सजा का प्रावधान है.
इसके अलावा जुर्माना भी लगाया जाता है, या दोनों सजा एक साथ भी दी जा सकती है.
अफसरों का कहना है कि शिकारी आस-पास गांव के होंगे, जिसका पता लगाया जा रहा है.