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मानसून सत्र से पहले बागी सांसदों पर फैसला ?

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24 जून 2026, 06:51 PM 4 मिनट में पढ़ें 1

ओम बिरला
ओम बिरला

नई दिल्ली । डेस्क: संसद के आगामी मानसून सत्र से ठीक पहले देश की राजनीति में दलबदल का मामला एक बार फिर गरमा गया है. सूत्रों के अनुसार, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला तृणमूल कांग्रेस और शिव सेना के बागी सांसदों की अयोग्यता के संबंध में जुलाई के तीसरे सप्ताह में शुरू होने वाले मानसून सत्र से पहले कोई बड़ा निर्णय ले सकते हैं. 


संसद के भीतर मचे इस घमासान के बीच दोनों मूल दलों ने अपने-अपने बागी सांसदों को अयोग्य घोषित करने की मांग पुरजोर तरीके से उठाई है. इस संबंध में लोकसभा अध्यक्ष ने तृणमूल कांग्रेस के संसदीय दल के नेता अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व वाले प्रतिनिधिमंडल और बागी गुट से मुलाकात कर उनका पक्ष सुना है. इसके साथ ही शिव सेना (यूबीटी) के नेताओं के साथ भी इसी तरह की चर्चा की गई है.


इस पूरे कानूनी और संवैधानिक संकट को सुलझाने के लिए लोकसभा अध्यक्ष के निर्देश पर संसद के कानूनी और संवैधानिक विशेषज्ञ लगातार विचार-विमर्श कर रहे हैं. विशेषज्ञों के इन इनपुट्स के आधार पर ही लोकसभा अध्यक्ष कोई अंतिम और कानून सम्मत निर्णय लेंगे. 


सूत्रों का कहना है कि पूर्व में पीठासीन अधिकारियों द्वारा इसी तरह की परिस्थितियों में दिए गए फैसलों और मिसालों का भी बारीकी से अध्ययन किया जा रहा है, ताकि आने वाला निर्णय हर संवैधानिक और कानूनी पहलू से मजबूत हो. इसी बीच, लोकसभा सचिवालय मानसून सत्र के लिए सदन के भीतर बैठने की नई व्यवस्थाओं की समीक्षा में जुट गया है. 


दरअसल, टीएमसी और शिव सेना (यूबीटी) के बागी गुटों के अलावा द्रमुक (डीएमके) ने भी कांग्रेस से अलग बैठने की व्यवस्था की मांग की है. यह राजनीतिक बदलाव तब आया जब मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने तमिलनाडु में द्रमुक के साथ अपना दशकों पुराना गठबंधन तोड़कर मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की पार्टी टीवीके के साथ हाथ मिला लिया.


अगर संख्या बल की बात करें तो साल 2024 के लोकसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर कुल 29 सांसद निर्वाचित हुए थे. इनमें से 20 सांसदों ने पार्टी से नाता तोड़ लिया और पश्चिम बंगाल के हावड़ा में मुख्यालय वाली एक गैर-मान्यता प्राप्त पंजीकृत पार्टी 'नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी ऑफ इंडिया' (एनसीपीआई) में शामिल हो गए. 


इन बागी सांसदों ने न केवल अलग बैठने की व्यवस्था मांगी है, बल्कि नरेंद्र मोदी सरकार के प्रति अपनी निष्ठा जताते हुए सत्ताधारी एनडीए में शामिल होने की इच्छा भी प्रकट की है. गौरतलब है कि टीएमसी के एक सांसद का निधन हो जाने के कारण फिलहाल वह सीट खाली है. 


दूसरी तरफ, शिव सेना (यूबीटी) के टिकट पर 9 सांसद चुनाव जीते थे, जिनमें से 6 सांसद पाला बदलकर महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली वास्तविक शिव सेना में शामिल हो चुके हैं.


दोनों ही दलों ने लोकसभा अध्यक्ष के सामने दलील दी है कि उनके बागी सांसदों का यह कदम सीधे तौर पर दलबदल विरोधी कानून के दायरे में आता है, इसलिए उन्हें अयोग्य ठहराया जाना चाहिए. 


टीएमसी के वरिष्ठ नेता अभिषेक बनर्जी ने दलील दी कि बागी सांसदों का एनसीपीआई में 'विलय' का दावा पूरी तरह से अवैध है. कानून के अनुसार, पूरी पार्टी का दो-तिहाई हिस्सा किसी दूसरी पार्टी में मिलना चाहिए, न कि केवल कुछ व्यक्तिगत विधायक या सांसद अपनी मर्जी से विलय कर सकते हैं. बनर्जी ने इसके लिए लोकसभा अध्यक्ष को 20 अलग-अलग याचिकाएं सौंपी हैं. 


उधर, शिव सेना (यूबीटी) के सांसदों अनिल देसाई और अरविंद सावंत ने भी ओम बिरला से मुलाकात कर संविधान की दसवीं अनुसूची का हवाला दिया. उन्होंने कहा कि कोई भी विधायी दल अपने दम पर किसी दूसरी पार्टी में विलय नहीं कर सकता, भले ही उनके पास दो-तिहाई बहुमत क्यों न हो. बहरहाल, मानसून सत्र के नजदीक आते ही अब सबकी निगाहें लोकसभा अध्यक्ष के अंतिम फैसले पर टिकी हुई हैं.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP