छत्तीसगढ़ की जानलेवा सड़कें, हर दिन 17 मौत
रायपुर | आयुषी शर्माः कभी सड़कें विकास का प्रतीक मानी जाती थीं. नए राजमार्ग, चौड़ी सड़कें और तेज़ रफ्तार से दौड़ती गाड़ियाँ, इन्हें प्रगति का पैमाना कहा जाता था. लेकिन आज वही सड़कें छत्तीसगढ़ के परिवारों के लिए मातम की वजह बन रही हैं.
भारत सरकार की Road Accidents in India की ताज़ा रिपोर्ट दिल दहलाने वाली हैं. सड़कें जीवन की धड़कन होती हैं, लेकिन यही सड़कें अब छत्तीसगढ़ में मौत का रास्ता बन चुकी हैं.
छत्तीसगढ़ में हर दिन 17 लोगों की सड़क दुर्घटना में मौत हो रही है.
मौतों में 23 प्रतिशत की वृद्धि
2023 में छत्तीसगढ़ में तेरह हज़ार चार सौ अड़सठ (13,468) हादसे हुए. पहली नज़र में यह संख्या बहुत बड़ी न लगे, लेकिन जब हम मौतों की तरफ़ देखते हैं तो दिल दहल उठता है. एक ही साल में छह हज़ार एक सौ छियासठ (6,166) लोग सड़क पर दम तोड़ गए.
ये सिर्फ़ आंकड़े नहीं हैं, ये छह हज़ार एक सौ छियासठ (6,166) घर हैं, जहाँ आज भी किसी पिता की कुर्सी खाली है, किसी माँ की आँखें आंसुओं से भीगी हैं, किसी बच्चे की खिलखिलाहट हमेशा के लिए थम गई है.
2019 से अब तक मौतों में 23 प्रतिशत की वृद्धि हुई है. सोचिए, पाँच साल पहले जो बच्चा स्कूल जा रहा था, वह आज कॉलेज के रास्ते में ज़रा-सी लापरवाही की वजह से अपने घर वापस नहीं आया.
जो नौजवान रोज़ मेहनत करके परिवार पाल रहा था, वह अब सिर्फ़ तस्वीर बनकर दीवार पर टंगा रह गया है.
राष्ट्रीय औसत से ज्यादा मौतें
सबसे दुखद यह है कि छत्तीसगढ़ की सड़कें राष्ट्रीय औसत से भी ज्यादा खतरनाक साबित हो रही हैं. प्रत्येक 100 हादसों में 46 मौतें, यह संख्या हमें बताती है कि यहाँ दुर्घटनाएँ ज्यादा जानलेवा हैं. राष्ट्रीय औसत 36 है, यानी छत्तीसगढ़ की सड़क पर कदम रखना और भी जोखिम भरा है.
छत्तीसगढ़ को लेकर जो ताज़ा आंकड़े आए हैं, वो बताते हैं कि 2023 में कुल तेरह हज़ार चार सौ तिरसठ (13,463) सड़क दुर्घटनाएं हुईं.
यह आँकड़ा पिछले साल से सिर्फ 1.4% ज्यादा है. लेकिन तस्वीर का असली डरावना हिस्सा है, मौतों की संख्या. 2022 में जहां पाँच हज़ार आठ सौ चौंतीस (5,834) लोग सड़क हादसों में मारे गए थे, वहीं 2023 में यह संख्या बढ़कर छह हज़ार एक सौ छियासठ (6,166) हो गई.
यानी मौतों में 5.7% की वृद्धि और अगर हम 2019 से तुलना करें तो पांच साल में सड़क हादसों से मरने वालों की संख्या लगभग 23% बढ़ी है. इसका मतलब है, छत्तीसगढ़ की सड़कें सिर्फ हादसों का नहीं, बल्कि मौत का भी गढ़ बनती जा रही हैं.
इन आँकड़ों से साफ है कि हादसों की संख्या स्थिर है, लेकिन उनसे होने वाली मौतें तेज़ी से बढ़ रही हैं. 2023 में छत्तीसगढ़ में प्रति 100 हादसों में लगभग छियालिस (46) लोगों की मौत हुई.
यह दर, जिसे Severity Rate कहते हैं, राष्ट्रीय औसत छत्तीस (36) मौत प्रति 100 हादसे से कहीं ज्यादा है. यानी छत्तीसगढ़ में सड़क हादसे अगर होते हैं, तो उनके घातक होने की आशंका ज्यादा रहती है.
छत्तीसगढ़ में सड़क दुर्घटनाएं 2023
हादसे: 13,468
मौतें: 6,166
घायल: 11,723
राष्ट्रीय रैंक:
हादसों में 12वाँ
मौतों में 11वाँ
छत्तीसगढ़ में सड़क हादसे
2019- 13,899
2020- 11,656
2021- 12,375
2022- 13,279
2023- 13,468
मौतों में 5 साल में 23% उछाल
2019- 5,003
2020- 4,606
2021- 5,371
2022- 5,834
2023- 6,166
अब सवाल उठता है कि हादसों का यह पैटर्न क्यों खतरनाक होता जा रहा है? रिपोर्ट बताती है कि भारत में ज्यादातर दुर्घटनाएं सीधे और खुले मार्गों पर होती हैं. छत्तीसगढ़ में भी यही ट्रेंड देखने को मिलता है.
यानी सड़क की खराबी नहीं, बल्कि मानव व्यवहार, तेज़ रफ्तार, हेलमेट और सीट बेल्ट का न पहनना, ओवरटेकिंग और शराब पीकर ड्राइविंग, इन हादसों के मुख्य कारण हैं.
युवा वर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित है. देश भर की तरह छत्तीसगढ़ में भी 18 से 45 साल आयु वर्ग हादसों का सबसे बड़ा शिकार बन रहा है.
छत्तीसगढ़ में सड़क दुर्घटनाओं में 18-45 वर्ष के लोगों की मौत का आंकड़ा 66 फीसदी है.
सड़क मौतों में करीब 45% बाइक सवार
छत्तीसगढ़ में मौतों की सबसे बड़ी वजह बन रहे हैं दो-पहिया वाहन चालक और सवार. रिपोर्ट के मुताबिक भारत में कुल सड़क मौतों में करीब 45% हिस्सा बाइक-सवारों का है.
छत्तीसगढ़ का पैटर्न भी बिल्कुल ऐसा ही है. हेलमेट न पहनने की वजह से सिर पर चोटें घातक बन जाती हैं. इसके अलावा, पैदल चलने वाले लोग, जिनकी राष्ट्रीय हिस्सेदारी 20% के आसपास है, वे भी लगातार बड़ी संख्या में शिकार हो रहे हैं.
हादसों में सबसे असुरक्षित: बाइक और पैदल यात्री
दोपहिया वाहन-45%
पैदल यात्री- 20%
अन्य वाहन-35%
गांव की सड़कों पर सबसे ज्यादा खतरा
छत्तीसगढ़ का एक और चेहरा रिपोर्ट में सामने आता है, ग्रामीण बनाम शहरी इलाक़े. देशभर की तरह यहां भी सड़क मौतों का बड़ा हिस्सा ग्रामीण इलाक़ों से आता है. छत्तीसगढ़ में भी ग्रामीण इलाक़ों में हालात और भी भयावह हैं.
हरे-भरे खेतों के बीच से गुजरते राजमार्ग, रात की अधूरी रोशनी, और दुर्घटना के बाद अस्पताल पहुँचने में होने वाली देरी, ये सब मिलकर त्रासदी को और गहरा कर देते हैं.
गाँव के लोग सड़क किनारे खड़े रहते हैं, किसी एम्बुलेंस के इंतज़ार में, जो अक्सर बहुत देर से पहुँचती है.
ग्रामीण क्षेत्र- 68% मौतें
शहरी क्षेत्र- 32% मौतें
चालकों की लापरवाही
यह सच है कि हादसों की जड़ में अक्सर इंसानी लापरवाही होती है. हेलमेट न पहनना, सीट बेल्ट खोलकर चलना, मोबाइल फोन पर बात करते हुए गाड़ी चलाना, ये सब छोटी-सी भूलें नहीं, बल्कि जीवन और मौत के बीच की दीवार को गिरा देने वाले फैसले हैं.
दुर्भाग्य यह कि सबसे अधिक मर रहे हैं हमारे युवा, 18 से 45 साल की उम्र वाले, वही उम्र जिसमें इंसान सपनों से भरा होता है, जिम्मेदारियाँ निभा रहा होता है.
सरकारी लापरवाही भी एक बड़ा कारण
क्या यह हमारी नियति है? क्या हम हर साल हज़ारों अपनों को इस तरह सड़क पर खोते रहेंगे? यह सच है कि छत्तीसगढ़ में होने वाली अधिकांश सड़क दुर्घटनाओं के पीछे हमारी लापरवाही होती है.
हादसा सड़क पर नहीं होता, हादसा तब होता है जब हम नियमों को तोड़ते हैं. लेकिन कई जगहों पर सरकारी लापरवाही भी एक बड़ा कारण है.
सरकार को चाहिए कि सड़क दुर्घटनाओं वाले ब्लैक स्पॉट्स को तुरंत सुधारे, हाईवे पर निगरानी और तेज़ रफ्तार पर रोक लगाए, और ग्रामीण इलाक़ों में ट्रॉमा सेंटर स्थापित करे.
छत्तीसगढ़ की सड़क दुर्घटनाओं के आँकड़े सिर्फ नंबर नहीं हैं, ये कहानियाँ हैं, बिछड़े हुए सपनों की, टूटे हुए परिवारों की, और अधूरी रह गई ज़िंदगियों की. काश, हम सब भी अपनी ज़िम्मेवारी समझें.