छात्र प्रदर्शन से पहले देश भर में धरपकड़, CJP नेता का पुलिस के नाम संदेश
नई दिल्ली । डेस्क: राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली स्थित जंतर-मंतर पर होने वाले बड़े प्रदर्शन से ठीक पहले देश भर में राजनीतिक हलचल और पुलिसिया कार्रवाई तेज हो गई है. मतदाता सूचियों में कथित गड़बड़ी और संशोधन के विरोध में छात्र संगठनों और विपक्ष का गुस्सा चरम पर है. मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर शनिवार को दिल्ली में एक विशाल मार्च का आयोजन किया गया है.
हालांकि, इस प्रदर्शन से ठीक पहले देश के विभिन्न राज्यों से प्रदर्शनकारियों की धरपकड़ और हिरासत में लिए जाने की खबरें सामने आ रही हैं. कॉकरोच जनता पार्टी के सह-संयोजक आशुतोष रांका ने पुलिस बल के रवैये पर कड़ा एतराज जताते हुए उनसे अपनी अंतरात्मा की आवाज सुनने की भावुक और तीखी अपील की है.
पुलिस अधिकारियों से आशुतोष रांका की भावुक और तीखी अपील
कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के सह-संयोजक आशुतोष रांका ने पुलिसकर्मियों के नाम एक संदेश जारी करते हुए प्रदर्शनकारी छात्रों पर हो रही कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए हैं. उन्होंने पुलिसकर्मियों से आग्रह किया है कि वे देर रात छात्रों पर की जाने वाली कठोर कार्रवाई और उनके दमन पर पुनर्विचार करें. उन्होंने इतिहास का हवाला देते हुए पुलिस को चेतावनी दी कि उनके आज के कदम तय करेंगे कि भविष्य उन्हें किस रूप में याद रखेगा.
रांका ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि ऊपरी आदेशों के नाम पर अपने ही देश के बच्चों पर हाथ उठाना और उन्हें रात के अंधेरे में उठाना पूरी तरह से अमानवीय है. उन्होंने सवाल किया कि क्या पुलिसकर्मियों की नैतिकता और अंतरात्मा इस बात की इजाजत देती है.
ब्रिटिश शासनकाल का उल्लेख करते हुए रांका ने कहा कि गुलामी के दौर में भी कुछ पुलिसकर्मियों ने अपने ही देशवासियों पर गोलियां चलाई थीं और वे इसे अपनी ड्यूटी बताते थे, लेकिन देश आज भी उन्हें गद्दार ही मानता है. उन्होंने 20 जुलाई की घटना का जिक्र करते हुए दिल्ली पुलिस को कटघरे में खड़ा किया और सीधे तौर पर पूछा कि क्या वे इतिहास के पन्नों में जनरल डायर की तरह दर्ज होना चाहते हैं या फिर शहीद मंगल पांडे की तरह अमर होना चाहते हैं.
रांका ने स्पष्ट किया कि सभी प्रदर्शनकारी पढ़ाई-लिखाई करने वाले छात्र हैं जो महात्मा गांधी, बीआर अंबेडकर और देश के संविधान में विश्वास रखते हैं. वे पूरी तरह से अहिंसक रास्ते पर चलकर अपने अधिकारों और न्याय की लड़ाई लड़ रहे हैं.
आशुतोष रांका का पुलिस के नाम संदेश
"देशभर की पुलिस के नाम एक संदेश.
हमें पता है कि इस समय जो भी आपसे करवाया जा रहा है, वो ऊपर के निर्देश से हो रहा है. लेकिन आप अपने बच्चों पर ऐसे कैसे हाथ उठा रहे है? आप उनको रात के अंधेरे में ऐसे गुंडों की तरह कैसे लेकर जा रहे है?
क्या आपका मन इस बात की गवाही दे रहा है? क्या यह सब करने से आपके ज़मीर को ठेस नहीं पहुँच रही? क्या अगर आपके बच्चे होते, तो भी आप उनसे ऐसे ही बर्ताव करते?
ब्रिटिश राज में भी कुछ पुलिसकर्मी ऐसे थे जिन्होंने अपने ही देशवासियों के ख़िलाफ़ गोलियाँ चलायी थी, यह कहकर कि वो ड्यूटी कर रहे है. लेकिन याद रखिए, आज देश उन पुलिसवालों को गद्दार ही मानता है.
दिल्ली पुलिस के हाथों पर तो 20 July का खून है. क्या आप भी वही चाहते है?
आपको पता है कि हम सब पढ़ने लिखने वाले बच्चे है. हक की लड़ाई लड़ रहे है. अधिकारों की लड़ाई लड़ रहे है. आपको यह भी पता है कि हम गांधी और अंबेडकर में मानने वाले लोग है. अहिंसा और संविधान के रास्ते पर चलने वाले लोग है. हम ना हाथ उठायेंगे, ना मारपीट करेंगे.
लेकिन आपको यह भी पता होना चाहिए कि आप कुछ भी कर ले, हम हर हाल में कल जंतर मंतर पहुचेंगे. और देश को बचाने की ऐतिहासिक लड़ाई लड़ेंगे.
फ़ैसला आपको करना है, कि आप इतिहास में किस तरह याद किया जाना पसंद करेंगे - जनरल डायर की तरह, या शहीद मंगल पांडे की तरह?"
देश के अलग-अलग राज्यों से प्रदर्शनकारियों की धरपकड़
दिल्ली पहुंचने की कोशिश कर रहे छात्रों और कार्यकर्ताओं को रोकने के लिए कई राज्यों में व्यापक स्तर पर पुलिसिया कार्रवाई की जा रही है. आशुतोष रांका के अनुसार, देश भर में सीजेपी, छात्र संगठनों और सहयोगी समूहों से जुड़े लगभग 10,000 लोगों को पुलिस द्वारा हिरासत में लिया जा चुका है. सोशल मीडिया पर सामने आई तस्वीरों और वीडियो में कार्यकर्ताओं को बसों और गाड़ियों में भरकर अज्ञात स्थानों पर ले जाते हुए देखा जा सकता है.
महाराष्ट्र के पुणे से दिल्ली आ रहे छात्रों के एक बड़े समूह को रास्ते में ही रोककर बस में बैठा लिया गया और किसी अज्ञात स्थान पर भेज दिया गया. इसी तरह, मध्य प्रदेश पुलिस द्वारा भी बसों में सवार युवाओं को हिरासत में लेने की खबरें सामने आई हैं. पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में सीजेपी कार्यकर्ता अब्दुल और उनकी पूरी टीम को सादे कपड़ों में आए लोगों द्वारा जबरन उठाकर अज्ञात स्थल पर ले जाने का दावा किया गया है. आरोप है कि पुलिस प्रशासन वास्तविक अपराधों को रोकने के बजाय शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रख रहे छात्रों को निशाना बना रहा है.
राजस्थान, मध्य प्रदेश और तेलंगाना में पुलिसिया सख्ती
राजस्थान के अलवर जिले के कठूमर से सीजेपी के संगठनात्मक सह-प्रभारी दीपक बालियान को पुलिस द्वारा देर रात हिरासत में लेने का मामला गरमा गया है. बताया जा रहा है कि बालियान का पैर फ्रैक्चर था, इसके बावजूद पुलिस उन्हें जबरन उठाकर ले गई. इस घटना का सोशल मीडिया पर लाइव प्रसारण करने के बाद पुलिस कर्मियों ने उनसे वीडियो हटाने को कहा और इंकार करने पर उन्हें लगभग 100 किलोमीटर दूर तक ले जाकर देर रात वापस घर छोड़ दिया.
दूसरी ओर, तेलंगाना से ट्रेन के जरिए दिल्ली आ रहे कार्यकर्ताओं पर मध्य प्रदेश में कार्रवाई की गई. सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने आरोप लगाया कि भोपाल रेलवे स्टेशन पर मध्य प्रदेश पुलिस ने ट्रेन से ही तेलंगाना के सीजेपी कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया. इस तरह रेल और सड़क मार्गों पर सख्त नाकेबंदी करके कार्यकर्ताओं को राष्ट्रीय राजधानी तक पहुंचने से रोका जा रहा है.
दिल्ली और मुंबई में भी कार्यकर्ताओं पर पुलिस की नजर
प्रदर्शन की आहट से दिल्ली और मुंबई में भी पुलिस प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद और सख्त नजर आ रहा है. वामपंथी छात्र संगठन स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) ने आरोप लगाया है कि दिल्ली पुलिस के जवान कार्यकर्ताओं के घरों पर पहुंचकर उनके परिवारों को डराने और धमकाने का काम कर रहे हैं.
दिल्ली के एचकेएस सुरजीत भवन स्थित एसएफआई के केंद्रीय कार्यालय में लाठियों के साथ पहुंची पुलिस ने कार्यकर्ताओं का ब्योरा जुटाने का प्रयास किया. एसएफआई ने इसे पूरी तरह से डराने की साजिश करार देते हुए कहा कि वे इस तरह के दबाव के आगे नहीं झुकेंगे और बड़ी संख्या में प्रदर्शन में शामिल होंगे.
वहीं, मुंबई में नागरिक समाज से जुड़े दो प्रमुख कार्यकर्ताओं, फिरोज मिठीबोरवाला और सलीम साबूवाला को पुलिस ने हिरासत में लिया. काफी मीडिया दबाव के बाद दोनों कार्यकर्ताओं को इस शर्त पर रिहा किया गया कि वे मुंबई छोड़कर कहीं बाहर नहीं जाएंगे.
नागरिक अधिकारों के लिए काम करने वाले संगठनों ने नागरिकों की आवाजाही पर इस तरह के प्रतिबंध लगाने और पुलिस शक्तियों के बेजा इस्तेमाल पर गंभीर चिंता जताई है. तमाम बंदिशों और गिरफ्तारियों के बावजूद आयोजकों ने साफ कर दिया है कि वे किसी भी कीमत पर जंतर-मंतर पहुंचकर देश के लोकतांत्रिक ढांचे को बचाने की अपनी लड़ाई जारी रखेंगे.