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जीन-संपादित धान किस्मों पर विवाद: सरकारी दावों पर सवाल

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02 नव. 2025, 05:38 PM 2 मिनट में पढ़ें 2

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नई दिल्ली । डेस्क: कृषि मंत्रालय द्वारा दो स्वदेशी जीन-संपादित (gene-edited) धान किस्मों डीआरआर राइस 100 (कमला) और पूसा डीएसटी राइस 1-की श्रेष्ठता के दावों पर जेनेटिक इंजीनियरिंग विरोधी गठबंधन (Coalition for a GM-Free India) ने सवाल उठाए हैं. गठबंधन का आरोप है कि सरकारी आंकड़े ही इन दावों का समर्थन नहीं करते और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) ने 2023 और 2024 के परीक्षणों से चुनिंदा डेटा का उपयोग किया है.


मई में मंत्रालय ने कहा था कि ये किस्में उच्च उत्पादन, जलवायु अनुकूलन क्षमता, नमक सहनशीलता और जल संरक्षण के माध्यम से "क्रांतिकारी बदलाव" ला सकती हैं. 

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ICAR ने दावा किया था कि 'कमला' में मूल किस्म सांबा मसूरी की तुलना में औसत उपज में लगभग 19 प्रतिशत की वृद्धि और 20 दिन पहले परिपक्वता दर्ज की गई है. 

वहीं, 'पूसा डीएसटी राइस 1' खारी और क्षारीय मिट्टी में उपज को 9.7 से 30.4 प्रतिशत तक बढ़ा सकती है.


हालांकि, जेनेटिक इंजीनियरिंग विरोधी गठबंधन ने ICAR की प्रकाशित वार्षिक रिपोर्टों का हवाला देते हुए दावा किया है कि 'कमला' ने 2023 के 19 परीक्षण स्थलों में से 8 और 2024 के 14 में से 8 में खराब प्रदर्शन किया. 


उनका आरोप है कि 14 साइटों में औसत उपज वृद्धि मात्र 2.8 प्रतिशत है, लेकिन चुनिंदा साइटों के आधार पर 21 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाई गई है. 


इसी तरह, उन्होंने ICAR के जल्दी फूल आने और 'पूसा डीएसटी 1' के तटीय लवणता में उच्च उपज के दावों पर भी प्रश्नचिन्ह लगाया है.


जेनेटिक इंजीनियरिंग विरोधी गठबंधन की सदस्य कविता कुरुगंटी ने कहा कि मंत्रालय के दावे वैज्ञानिक सत्यनिष्ठा पर सवाल उठाते हैं और किसानों को गुमराह कर सकते हैं. 


दूसरी ओर, ICAR से जुड़े वैज्ञानिकों ने गुमनाम रहते हुए आरोपों को "परीक्षण प्रक्रिया की गलतफहमी" और "प्रकाशित परिणामों के चयनात्मक उपयोग" का परिणाम बताया है. उन्होंने जोर देकर कहा कि नई किस्मों का विकास और मूल्यांकन स्थापित प्रक्रियाओं का पालन करता है.


वैज्ञानिकों ने यह भी कहा कि इन किस्मों के प्रदर्शन पर अंतिम निर्णय किसानों पर निर्भर करेगा. 


उनका कहना है, "किस्मों के बारे में अंतिम फैसला किसान ही देंगे, न कि हम. किसान उन्हीं किस्मों को अपनाते हैं जो उन्हें आकर्षक लगती हैं." 


दोनों किस्में फिलहाल खेती के लिए जारी होने से पहले कुछ प्रक्रियात्मक स्वीकृतियों का इंतजार कर रही हैं. जेनेटिक इंजीनियरिंग विरोधी गठबंधन ने सरकार से परीक्षण डेटा और कार्यप्रणाली की स्वतंत्र, पारदर्शी वैज्ञानिक समीक्षा कराने की मांग की है. (Symbolic Photo)

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP