शुक्र, 16 अक्टू. 2026

CGKhabar

इन विधेयकों के लिए दो-तिहाई बहुमत जरूरी है- गौतम भाटिया

C

CG Khabar

21 अग. 2025, 07:44 AM 4 मिनट में पढ़ें 1

गौतम भाटिया
गौतम भाटिया

नई दिल्ली । डेस्क: संवैधानिक कानून के विद्वान और अधिवक्ता गौतम भाटिया ने तीन नए विधेयकों, विशेष रूप से संविधान (एक सौ तीसवां संशोधन) विधेयक, के संदर्भ में महत्वपूर्ण बिंदु उठाया है. उन्होंने एक्स पर लिखा, “यह समझ से परे है कि लोग इन तीन नए विधेयकों की रिपोर्टिंग में यह महत्वपूर्ण तथ्य क्यों छोड़ रहे हैं कि इन्हें पारित करने के लिए दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता है जो कि विपक्ष के व्यापक समर्थन के बिना असंभव है.” 


यह विधेयक बिना दोषसिद्धि के 30 दिनों तक जेल में रहने वाले प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या किसी अन्य मंत्री को हटाने का प्रावधान करता है.


वरिष्ठ अधिवक्ता और कार्यकर्ता इंदिरा जयसिंग ने इस विधेयक का पूर्ण रूप से विरोध किया. उन्होंने कहा, “ऐसे देश में जहां आपराधिक कानून का उपयोग उत्पीड़न के लिए किया जाता है, न कि अभियोजन के लिए, और विपक्षी दलों को खत्म करने के लिए एक हथियार के रूप में इस्तेमाल होता है, संवैधानिक संशोधन स्वयं संविधान को हथियार बनाने का काम करता है. जब ईडी और सीबीआई केंद्र सरकार के प्रत्यक्ष नियंत्रण में हैं, तो संघवाद नष्ट हो जाता है. कानून और व्यवस्था, जो राज्य का विषय है, को राज्य सूची से हटाकर केंद्र को सौंप दिया जाता है.”


जयसिंग ने आगे कहा, “इससे एकदलीय शासन की ओर बढ़ा जा सकता है, क्योंकि सत्तारूढ़ दल के मंत्री ही बचे रहेंगे, बाकी सभी जेल में होंगे. लेकिन यह दावा करने से पहले कि वे नैतिक रूप से उच्च स्तर पर हैं, मैं कहना चाहूंगी कि मैं भी उच्च पदों पर भ्रष्टाचार का विरोध करती हूं, लेकिन इसका समाधान ईमानदार अभियोजन है, न कि सार्वजनिक पद से अयोग्य ठहराना.”


वरिष्ठ अधिवक्ता संजय हेगड़े ने ‘द टेलीग्राफ’ को बताया, “यह अयोग्यता अस्थायी है और केवल तब तक लागू है जब तक व्यक्ति जेल में है. रिहाई के बाद वह फिर से पद संभाल सकता है.” 


हालांकि, उन्होंने दुरुपयोग की संभावना पर जोर देते हुए कहा, “इसके दुरुपयोग की बहुत अधिक संभावना है. मैं देख सकता हूं कि केंद्र में मजबूत सरकारें इसका उपयोग राज्यों में मजबूत सरकारों के खिलाफ करेंगी. अगर कोई मजबूत मुख्यमंत्री आपके खिलाफ है, तो आप चुनाव से पहले उसे निशाना बना सकते हैं, उसे मुख्यमंत्री पद से हटा सकते हैं, और उसके समर्थकों को अपने पक्ष में कर सकते हैं.”


उन्होंने यह भी कहा कि इसका उपयोग राष्ट्रीय सत्तारूढ़ दल के अपने ही मुख्यमंत्रियों के खिलाफ, जो चुनौती बन सकते हैं, या सहयोगी दलों के खिलाफ भी किया जा सकता है. 


उन्होंने उदाहरण दिया, “चंद्रबाबू नायडू मुख्यमंत्री बनने से पहले जेल में थे.”


डीएमके के राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता पी. विल्सन ने एक्स पर लिखा कि “गृह मंत्री अमित शाह द्वारा पेश किया गया 130वां संविधान संशोधन विधेयक स्पष्ट रूप से भारत को तानाशाही में बदलने की शैतानी योजना का हिस्सा है.” उन्होंने कहा, “ये कदम जर्मनी में एडॉल्फ हिटलर द्वारा उठाए गए कदमों की याद दिलाते हैं. याद रखें, उन्होंने भी सत्ता हथियाई थी और 1933 के सक्षमता अधिनियम (Enabling Act) के माध्यम से जर्मनी के संविधान को नष्ट किया था.”


विल्सन ने तर्क दिया, “केंद्र सरकार के इशारे पर काम करने वाली केंद्रीय एजेंसियों द्वारा केवल मामला दर्ज करने और गिरफ्तारी से कोई व्यक्ति ‘दोषी’ नहीं हो जाता.” 


उन्होंने उदाहरण दिया, “बीजेपी के राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों के खिलाफ ईडी द्वारा दर्ज 193 मामलों में से केवल दो में सजा हुई है, जो साबित करता है कि 191 मामले झूठे और राजनीतिक कारणों से दर्ज किए गए हैं. आप के सत्येंद्र जैन का उदाहरण देखें बहुत हंगामे के बाद, सीबीआई ने स्वयं उनके खिलाफ एक मामले में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की है.”


उन्होंने आगे कहा, “प्रधानमंत्री की गिरफ्तारी के लिए राष्ट्रपति की मंजूरी आवश्यक है (जो प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाले केंद्रीय मंत्रिमंडल की सलाह पर दी जाती है). मुख्यमंत्री या राज्य के मंत्री के लिए, हालांकि मंजूरी राज्य मंत्रिमंडल की सलाह पर राज्यपाल द्वारा दी जानी चाहिए, हमने कई बीजेपी द्वारा नियुक्त राज्यपालों को राज्य मंत्रिमंडल की सलाह के खिलाफ और केंद्र सरकार के इशारे पर काम करते देखा है.”


“इसलिए, यह ‘स्केच’ सभी के लिए स्पष्ट है - जब भी कोई मजबूत क्षेत्रीय नेता प्रधानमंत्री का विरोध करता है, तो उसके खिलाफ झूठा मामला दर्ज करो, ईडी या सीबीआई से गिरफ्तार करो और उसे मुख्यमंत्री या मंत्री के पद से हटा दो.”

यह खबर शेयर करें: WhatsApp Facebook
CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP