बाइक पर 3 सवारी होने से नहीं कम हो सकता मुआवजा- HC
बिलासपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने मोटर दुर्घटना मुआवजे से जुड़े एक मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है. कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि मोटरसाइकिल पर तीन लोगों के सवार होने (ट्रिपलिंग) मात्र से यह नहीं मान लिया जाएगा कि दुर्घटना में उनकी भी लापरवाही (कंट्रीब्यूटरी नेग्लिजेंस) थी.
अदालत ने कहा कि जब तक ऐसा कोई सबूत न हो जिससे यह साबित हो कि ट्रिपलिंग की वजह से ही हादसा हुआ, तब तक केवल इस आधार पर मुआवजे की राशि में कटौती नहीं की जा सकती.
यह फैसला एक अपील पर सुनवाई के दौरान आया, जिसमें मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण के आदेश को चुनौती दी गई थी. ट्रिब्यूनल ने हादसे में मारे गए एक व्यक्ति के परिजनों को दी जाने वाली मुआवजे की राशि में से 50 फीसदी की कटौती सिर्फ इसलिए कर दी थी क्योंकि हादसे के वक्त बाइक पर तीन लोग सवार थे.
इसके अलावा ट्रिब्यूनल ने मृतक की मासिक आय का आकलन भी बेहद कम किया था.
मामले की सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने ट्रिब्यूनल के फैसले को सुप्रीम कोर्ट के स्थापित कानूनी सिद्धांतों के विपरीत पाया. अदालत ने कहा कि बाइक पर तीन लोगों की मौजूदगी को सीधे तौर पर लापरवाही का कारण नहीं माना जा सकता. इसके साथ ही कोर्ट ने न्यूनतम मजदूरी अधिसूचना का हवाला देते हुए मृतक की मासिक आय को भी संशोधित किया.
हाई कोर्ट ने ट्रिब्यूनल द्वारा की गई 50 प्रतिशत मुआवजे की कटौती को पूरी तरह रद्द कर दिया और कुल मुआवजे की राशि को बढ़ाकर 18,88,606 रुपये कर दिया. अदालत ने संबंधित प्रतिवादी को निर्देश दिया है कि वह बढ़े हुए मुआवजे की अतिरिक्त राशि 7.5 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ तीन महीने के भीतर जमा करे.