जशपुर में कमर्शियल गैस की किल्लत: चूल्हे और स्टोव के भरोसे छोटे कारोबारी, कई दुकानें बंद
जशपुरनगर । डेस्क: छत्तीसगढ़ के जशपुरनगर में पिछले करीब साढ़े तीन सप्ताह से व्यावसायिक गैस सिलेंडरों की आपूर्ति ठप होने से स्थानीय खान-पान का बाजार पूरी तरह चरमरा गया है. 25 दिनों से जारी इस संकट ने सबसे गहरा प्रहार उन छोटे दुकानदारों और रेहड़ी-पटरी वालों पर किया है, जिनका गुजारा दैनिक बिक्री पर निर्भर है.
शहर के बस स्टैंड सहित प्रमुख चौराहों पर लगने वाले नाश्ते के दर्जनों ठेले गैस न मिलने के कारण बंद हो चुके हैं, जिससे कई परिवारों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है.
बाजार में पैदा हुए इस अभाव के चलते जो दुकानदार अभी भी मैदान में डटे हैं, उन्हें मजबूरी में दशकों पुराने तौर-तरीकों की ओर लौटना पड़ रहा है.
बस स्टैंड पर लंबे समय से जलपान का ठेला लगाने वाले दिनेश जैसे कई कारोबारी अब अपने पुराने केरोसिन स्टोव को धूल झाड़कर बाहर निकाल चुके हैं.
आधुनिक गैस चूल्हों की जगह अब फिर से स्टोव में हवा भरने की आवाजें सुनाई दे रही हैं या फिर लकड़ी के धुएं के बीच नाश्ता तैयार किया जा रहा है. कारोबारियों का कहना है कि गैस के बिना काम करना न केवल थकाऊ है, बल्कि इससे लागत और समय भी बढ़ गया है.
इस सप्लाई चेन के टूटने का सीधा असर आम नागरिकों की जेब पर भी पड़ा है.
जशपुर में ठेले और गुमटियों पर मिलने वाला सस्ता और सुलभ नाश्ता अब दुर्लभ होता जा रहा है.
कई ठेलों के बंद होने से शहरवासियों को कम कीमत पर मिलने वाले खाद्य पदार्थ नहीं मिल पा रहे हैं. स्थानीय व्यापारियों ने प्रशासन से जल्द से जल्द कमर्शियल सिलेंडर की आपूर्ति बहाल करने की मांग की है ताकि ठप पड़ा यह छोटा व्यवसाय फिर से पटरी पर लौट सके.