डोनाल्ड ट्रंप के 'मसीहा' अवतार से भड़का ईसाई समुदाय
नई दिल्ली । डेस्क: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर बड़े विवादों के केंद्र में हैं. ट्रंप द्वारा खुद को ईसा मसीह के समान एक 'मसीहा' के रूप में दिखाने वाली एआई-जनरेटेड तस्वीर सोशल मीडिया पर साझा करने और वेटिकन के सर्वोच्च धर्मगुरु पोप लियो XIV पर तीखे हमले करने के बाद अमेरिका सहित पूरी दुनिया के ईसाई समुदाय में भारी नाराजगी देखी जा रही है.
यह विवाद तब शुरू हुआ जब ट्रंप ने अपने 'ट्रुथ सोशल' प्लेटफॉर्म पर एक तस्वीर पोस्ट की, जिसमें वे सफेद चोग़ा पहने एक व्यक्ति को चंगा करते हुए दिखाई दे रहे थे. हालांकि, भारी आलोचना के बाद सोमवार को इस पोस्ट को हटा दिया गया. विवाद को और हवा तब मिली जब ट्रंप ने पोप लियो XIV की आलोचना करते हुए उन्हें "अपराध पर नरम" और "विदेश नीति के लिए भयानक" करार दिया.
Nothing matters more than Jesus. & while we strive to become less of ourselves and more like Him in pursuit of humility, we will never be Him.
This post is, frankly, disgusting and unacceptable, but also a profound misreading of the American people experiencing a true and… https://t.co/gyFO04Lri0
— Isabel Brown (@theisabelb) April 13, 2026
इस पूरे घटनाक्रम पर सफाई देते हुए ट्रंप ने संवाददाताओं से कहा कि उन्होंने इस तस्वीर को एक "डॉक्टर" या "रेड क्रॉस कार्यकर्ता" के रूप में देखा था, न कि किसी धार्मिक आकृति के रूप में. उन्होंने मीडिया पर मामले को तूल देने का आरोप लगाते हुए कहा कि केवल "फर्जी खबरें" ही इसे गलत तरीके से पेश कर सकती हैं.
साथ ही, ट्रंप ने स्पष्ट किया कि वे ऐसा पोप नहीं चाहते जो संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति की आलोचना करे.
दूसरी ओर, अल्जीरिया की यात्रा पर जा रहे पोप लियो XIV ने इस बहस में पड़ने से इनकार कर दिया. उन्होंने शांति, संवाद और युद्ध के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद रखने की प्रतिबद्धता दोहराई. पोप ने कहा कि दुनिया में बहुत से निर्दोष लोग मारे जा रहे हैं और किसी न किसी को तो इसके खिलाफ खड़ा होना ही होगा.
वेटिकन और व्हाइट हाउस के बीच तनाव पिछले कुछ महीनों से आव्रजन नीतियों और सैन्य कार्रवाइयों को लेकर चरम पर है. अमेरिकी कैथोलिक नेताओं ने भी ट्रंप के बयानों की कड़ी निंदा की है.
अमेरिकी कैथोलिक Bishops सम्मेलन के अध्यक्ष आर्कबिशप पॉल एस. कोकली ने कहा कि पोप कोई राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी नहीं हैं, बल्कि वे सुसमाचार की सच्चाई और आत्माओं की देखभाल के लिए बोलते हैं.
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी ट्रंप को आलोचना झेलनी पड़ रही है. इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने ट्रंप के शब्दों को "अस्वीकार्य" बताते हुए कहा कि शांति का आह्वान करना पोप का अधिकार और कर्तव्य है.
हैरानी की बात यह है कि इस बार ट्रंप को अपने कट्टर समर्थकों और रूढ़िवादी खेमे से भी कड़े विरोध का सामना करना पड़ रहा है. रिपब्लिकन नेशनल कमेटी के पूर्व सलाहकार ब्रिलिन होलीहैंड ने इसे "घोर ईशनिंदा" करार दिया, जबकि फॉक्स न्यूज की होस्ट राइली गेन्स ने ट्रंप को विनम्रता की सलाह देते हुए कहा कि ईश्वर का मजाक नहीं उड़ाया जाना चाहिए.
डेली वायर की लेखिका मेगन बैशम ने ट्रंप से इस कृत्य के लिए माफी की मांग की है.
वहीं, विपक्षी खेमे से सीनेटर बर्नी सैंडर्स ने ट्रंप के व्यवहार को "अहंकारी और विक्षिप्त" बताया है. हालांकि 2024 के चुनाव में ट्रंप को ईसाइयों और कैथोलिकों का बड़ा समर्थन मिला था, लेकिन इस ताजा विवाद ने उनके धार्मिक आधार के बीच एक बड़ी दरार पैदा कर दी है. विशेषज्ञों का मानना है कि आस्था को राजनीतिक ढाल बनाना ट्रंप के लिए इस बार महंगा साबित हो सकता है.