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ईसाइयों पर हमले: उत्तर प्रदेश शीर्ष पर, छत्तीसगढ़ 2 नंबर पर

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04 अग. 2025, 02:14 PM 3 मिनट में पढ़ें 1

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नई दिल्ली । डेस्क: एक रिपोर्ट के अनुसार ईसाइयों पर हमले के मामले में छत्तीसगढ़ दूसरे नंबर पर है. इवेंजेलिकल फेलोशिप ऑफ इंडिया की रिलिजियस लिबर्टी कमीशन (EFIRLC) की एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी से जुलाई 2025 तक भारत के 22 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में ईसाइयों के खिलाफ 334 हमले दर्ज किये गये. यह आंकड़ा धार्मिक स्वतंत्रता पर बढ़ते खतरे को दर्शाता है, जिसमें उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक 95 हमले और छत्तीसगढ़ में 86 हमले शामिल हैं. 


ये दोनों राज्यों में कुल मामलों का 54% से अधिक हिस्सा हैं. अन्य राज्यों में मध्य प्रदेश (22), बिहार (17), कर्नाटक (17), हरियाणा (17), और राजस्थान (15) में भी उल्लेखनीय मामले सामने आये हैं.


रिपोर्ट के अनुसार, मार्च में सर्वाधिक 66 हमले हुये, इसके बाद जून में 52 और फरवरी में 48 मामले दर्ज किये गये. कई हमले रविवार की प्रार्थना सभाओं को निशाना बनाकर किये गये, जो धार्मिक सभाओं की निगरानी और व्यवधान की सुनियोजित कोशिशों को दर्शाता है. 


हमलों में धमकी और उत्पीड़न (107), झूठे आरोप और गिरफ्तारी (116), शारीरिक हिंसा (42), गिरफ्तारी (49), चर्च सेवाओं में व्यवधान (29), सामाजिक बहिष्कार (19), तोड़फोड़ (7), चर्च जलाने (4), लिंग आधारित हिंसा (4), नफरत अभियान (3), जबरन धर्मांतरण (2), और हत्या (1) शामिल हैं.


छत्तीसगढ़ में विशेष रूप से गंभीर स्थिति देखी गई, जहां 13 मामलों में ईसाई परिवारों को उनके मृतकों को दफनाने से रोका गया, जिनमें से 12 मामले इसी राज्य से हैं. भिलाई, छत्तीसगढ़ में 20 जुलाई को बजरंग दल के सदस्यों ने एक प्रार्थना सभा में व्यवधान डाला और पादरियों पर अवैध धर्मांतरण का आरोप लगाया. 


पुलिस सुरक्षा के अनुरोध के बावजूद, छह पादरियों को हिरासत में लिया गया और जेल में उनके साथ मारपीट की गई. हमलावरों या जेल अधिकारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई. बस्तर, छत्तीसगढ़ में भी एक पादरी के शव को निजी जमीन पर दफनाने से रोका गया.


रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि ये 334 मामले केवल वे हैं जो दर्ज किये गये हैं. डर, अलगाव, और दस्तावेजीकरण की कमी के कारण कई घटनाएं सामने नहीं आतीं. 


EFIRLC ने गलत धर्मांतरण विरोधी कानूनों को रद्द करने, लापरवाह पुलिस अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई, नफरत फैलाने वाले समूहों पर मुकदमा, दफनाने के अधिकारों को लागू करने, पीड़ितों को मुआवजा, और धार्मिक स्वतंत्रता के मामलों के लिये त्वरित अदालतों की स्थापना की सिफारिश की है.


यह रिपोर्ट पीड़ितों के बयानों, पुलिस और चिकित्सा रिकॉर्ड, स्थानीय भागीदार नेटवर्क, और फोटोग्राफिक साक्ष्यों पर आधारित है. EFIRLC 1998 से ऐसी घटनाओं को ट्रैक कर रहा है और धार्मिक उत्पीड़न के पीड़ितों की सहायता करने वाला एक प्रमुख मंच है.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP