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सुप्रीम कोर्ट की चौखट पर छत्तीसगढ़ के शिक्षक: मर्जर पूर्व सेवा को पेंशन में शामिल कराने की मांग

मर्जर से पहले की वर्षों पुरानी सेवा को पेंशन पात्रता से बाहर रखने के विरोध में छत्तीसगढ़ के शिक्षकों ने अब सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है.

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05 नव. 2026, 09:25 AM 2 मिनट में पढ़ें 33

सुप्रीम कोर्ट में पेंशन के लिये याचिका दायर
सुप्रीम कोर्ट में पेंशन के लिये याचिका दायर

नई दिल्ली । डेस्क: छत्तीसगढ़ में 1 जुलाई 2018 को सरकारी शिक्षक के रूप में शामिल किए गए शिक्षाकर्मियों की पुरानी सेवाओं की गणना को लेकर विवाद अब देश की सर्वोच्च अदालत पहुंच चुका है. पेंशन पात्रता के लिए मर्जर से पहले की गई लंबी सेवा अवधि को शामिल न किए जाने के फैसले को शिक्षकों ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है. 

रामलाल डड़सेना एवं अन्य बनाम छत्तीसगढ़ शासन के इस मामले में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दीपावली के बाद सुनवाई किए जाने की संभावना जताई जा रही है.

शिक्षकों का मुख्य पक्ष यह है कि उन्होंने संविलियन से पूर्व भी वर्षों तक पूर्ण प्रशासनिक नियंत्रण के तहत अपनी सेवाएं दी हैं. पेंशन निर्धारण के दौरान केवल मर्जर के बाद के समय की गणना करने से वर्ष 2028 के बाद ही कई शिक्षक पेंशन योग्य हो पाएंगे, जो कि पूर्व में दी गई लंबी सेवाओं के साथ सरासर भेदभाव है. 

इस याचिका में पंजाब, हिमाचल प्रदेश, गुजरात, मध्य प्रदेश उच्च न्यायालयों के विभिन्न ऐतिहासिक न्यायिक निर्णयों के साथ-साथ वर्ष 1962-63 के मध्य प्रदेश के आदेशों का भी संदर्भ दिया गया है.

इससे पूर्व यह मामला छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के समक्ष भी आया था, जहां अदालत ने राज्य शासन को काम की प्रकृति, निरंतरता और प्रशासनिक नियंत्रण को ध्यान में रखते हुए 120 दिनों के भीतर नीतिगत निर्णय लेने के निर्देश दिए थे. 

हाईकोर्ट का मानना था कि शिक्षकों की पूर्व सेवाओं को पूरी तरह अनदेखा नहीं किया जा सकता. हालांकि, शिक्षकों का आरोप है कि शासन ने अदालत की समयावधि के भीतर नई नीति का निर्माण करने के बजाय पुराने आदेशों का हवाला देते हुए उनके आवेदनों को निरस्त कर दिया.

इसी प्रशासनिक रुख से असंतुष्ट होकर शिक्षकों ने सर्वोच्च अदालत का रुख किया है. सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता आशुतोष गढ़े से दिल्ली में मुलाकात कर छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष संजय शर्मा, प्रदेश उपाध्यक्ष प्रवीण श्रीवास्तव और जगदलपुर जिला अध्यक्ष लुदरसन कश्यप ने इस कानूनी रणनीति पर विचार-विमर्श किया. 

संगठन ने इस विधिक लड़ाई को आगे जारी रखने का संकल्प व्यक्त करते हुए उन साथियों से सहयोग का आह्वान किया है जो पहले से इस प्रकार की सेवा गणना का लाभ प्राप्त कर रहे हैं.

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