तहसीलदारों की हड़ताल का असर: 20,000 मामले लंबित
रायपुर । संवाददाता: तहसीलदारों की हड़ताल के कारण प्रशासनिक कार्य बुरी तरह प्रभावित हुए हैं, जिसके चलते तहसीलों और राजस्व न्यायालयों में लंबित मामलों की संख्या में भारी वृद्धि हुई है. 20,000 से अधिक फाइलें निर्णय के लिए अटकी पड़ी हैं, जिससे नागरिकों और अधिकारियों में चिंता बढ़ रही है.
राज्य में तहसीलदारों की हड़ताल के कारण फाइलें जमा हो रही हैं. राज्य की सभी तहसीलों में लंबित मामलों की संख्या बढ़ने लगी है. सभी तहसीलों और राजस्व न्यायालयों में 20,000 से अधिक फाइलें लंबित हैं, जिन पर कोई निर्णय नहीं हो रहा है.
दूसरी ओर, वर्तमान शैक्षणिक सत्र के कारण सभी जिलों में छात्रों को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. आय, जाति और निवास प्रमाण पत्र बनवाने के लिए छात्रों को तहसीलों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं, लेकिन उन्हें निराशा ही हाथ लग रही है. राजस्व न्यायालयों में भी निर्णय अटके हुये हैं. हालांकि, रजिस्ट्री पर ज्यादा असर नहीं पड़ा है, लेकिन अन्य भूमि-संबंधी मामले रुक गए हैं.
तहसीलदारों की हड़ताल के कारण सामान्य दैनिक कार्य भी नहीं हो रहे हैं. सूत्रों के अनुसार, सभी जिलों में छात्रों की आय और जाति प्रमाण पत्र बनवाने की अधिकतम आवेदन पत्र लंबित हैं. कई मामलों में छात्रों के लिए समय सीमा के भीतर जमा करना अनिवार्य है, लेकिन हड़ताल के कारण तहसीलदारों के हस्ताक्षर नहीं हो रहे हैं.
निवास प्रमाण पत्र के आवेदनों की भी यही स्थिति है. स्कूली छात्र मदद की गुहार लगाते हुये भटक रहे हैं. नक्शा प्रति से लेकर शोध क्षमता प्रमाण पत्र तक के कार्य रुक गये हैं. इनमें से अधिकांश कार्य केवल तहसीलदारों और नायब तहसीलदारों की निगरानी, अनुमोदन और आदेशों के तहत ही होते हैं.
इसी तरह, धारा 115 के तहत त्रुटि सुधार जैसे कार्य भी प्रभावित हुये हैं. इसके अलावा, बैंक वसूली भी प्रभावित हुई है. मृत्यु हस्तांतरण से लेकर सीमांकन और विभाजन तक के मामलों पर निर्णय नहीं हो रहे हैं. सभी स्तरों के मामलों को मिलाकर लंबित फाइलों की संख्या 20,000 को पार कर चुकी है और यह संख्या हर दिन लगातार बढ़ रही है.
छत्तीसगढ़ कनिष्ठ प्रशासनिक सेवा संघ के अनुसार, यह आंदोलन शासन द्वारा लंबे समय से अनदेखी की जा रही मांगों, जैसे कार्यक्षमता में सुधार, संसाधनों की उपलब्धता, और संरचनात्मक बदलावों को लागू करने की मांग को लेकर किया जा रहा है.
तहसीलदार संघ ने अपनी 17 सूत्रीय मांगों को प्रमुखता से उठाया है, जिनमें शामिल हैं: तहसीलदारों को डिप्टी कलेक्टर के पद पर पदोन्नति, नायब तहसीलदारों को राजपत्रित अधिकारी का दर्जा, शासकीय मोबाइल फोन की सुविधा, परिवहन भत्ता, और महंगाई भत्ते की मांग. ये मांगें तहसीलदारों और नायब तहसीलदारों के कार्य को और प्रभावी बनाने के लिये जरूरी हैं, ताकि वे अपने दायित्वों को बेहतर ढंग से निभा सकें.
इसके अलावा, संघ ने प्रशासनिक और वित्तीय सुधारों से संबंधित कई अन्य मांगें भी उठाई हैं. इनमें राजस्व रिकॉर्ड और फसल आंकड़ों का रखरखाव, भूमि राजस्व और अन्य बकाया राशि का संग्रह, साथ ही पटवारियों के कार्यों की निगरानी जैसे महत्वपूर्ण कार्य शामिल हैं.
ये मांगें न केवल तहसीलदारों के कार्यभार को कम करने के लिये हैं, बल्कि राजस्व प्रशासन को और पारदर्शी व कुशल बनाने के लिये भी आवश्यक हैं.
इस आंदोलन के जरिये तहसीलदार संघ सरकार से अपनी मांगों पर त्वरित कार्रवाई की उम्मीद कर रहा है.
यह प्रदर्शन न केवल तहसीलदारों और नायब तहसीलदारों के हितों की रक्षा के लिये है, बल्कि प्रदेश के राजस्व प्रशासन को और सुदृढ़ करने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है.