नन निर्दोष हैं, उन्हें फंसाया जा रहा है- परिजनों का दावा
नई दिल्ली । डेस्क: छत्तीसगढ़ में आदिवासी महिलाओं की तस्करी और जबरन धर्मांतरण के आरोप में दो केरल ननों और एक व्यक्ति की गिरफ्तारी के बाद उनके परिजनों ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है.
एक महिला की बड़ी बहन ने द हिंदू से फोन पर कहा, "हमारे माता-पिता अब जीवित नहीं हैं. मैंने अपनी बहन को ननों के साथ आगरा में नर्सिंग की नौकरी के लिये भेजा था. मैंने भी लखनऊ में उनके साथ काम किया था और यह मेरी बहन को आत्मनिर्भर बनाने में मददगार था. मेरी बहन पूरी तरह सहमत थी. नन और सुकमन मंडावी को झूठे आरोपों में फंसाया जा रहा है."
इसी तरह, नारायणपुर में रहने वाली एक अन्य महिला की छोटी बहन ने ननों की रिहाई की मांग करते हुए कहा कि उनकी बहन 24 जुलाई को घर से नौकरी के लिये निकली थी. उन्होंने बताया कि उनका परिवार पांच साल पहले ईसाई धर्म में परिवर्तित हो चुका था.
तीनों परिवारों ने 26 जुलाई को नारायणपुर पुलिस को लिखित बयान दिया, जिसमें कहा गया कि वे जानते थे कि उनकी बेटियां नौकरी के लिए जा रही थीं.
25 जुलाई को छत्तीसगढ़ पुलिस ने नन प्रीति मैरी, वंदना फ्रांसिस और नारायणपुर के सुकमन मंडावी को गिरफ्तार किया था.
यह कार्रवाई बजरंग दल के स्थानीय सदस्य रवि निगम की शिकायत पर हुई, जिन्होंने दावा किया कि मंडावी तीन आदिवासी महिलाओं को दुर्ग रेलवे स्टेशन पर लाये थे, जहां से वे ननों के साथ आगरा जाने वाले थे. इस गिरफ्तारी के बाद 28 जुलाई को दिल्ली से केरल तक व्यापक विरोध प्रदर्शन शुरू हो गये.
वहीं, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने गिरफ्तारी का समर्थन करते हुये कहा, "प्रलोभन के जरिये मानव तस्करी और धर्मांतरण का प्रयास किया जा रहा था. यह महिलाओं की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला है."
उन्होंने एक्स पर लिखा, "छत्तीसगढ़ एक शांतिपूर्ण राज्य है, जहां सभी धर्मों और समुदायों के लोग सद्भाव से रहते हैं. इस मामले को राजनीतिक रंग देना दुर्भाग्यपूर्ण है."
दुर्ग रेलवे पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि वे परिजनों की सहमति के दावों की पुष्टि के लिए साक्ष्य जुटा रहे हैं. मामला अभी न्यायिक समीक्षा के अधीन है. मुख्यमंत्री ने कहा कि जांच जारी है और कानून अपना काम करेगा.