सोम, 19 अक्टू. 2026

CGKhabar

'केवल शक के आधार पर सजा नहीं', LIC लोन फ्रॉड केस में HC का फैसला

C

CG Khabar

06 मार्च 2026, 03:30 AM 2 मिनट में पढ़ें 2

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट

बिलासपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि कानून की नजर में केवल गहरा संदेह सबूत का स्थान नहीं ले सकता. जस्टिस रजनी दुबे की एकल पीठ ने भारतीय जीवन बीमा निगम की बिलासपुर शाखा में हुए करीब 1 लाख रुपये के लोन धोखाधड़ी मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए दो आरोपियों, अविनाश पंडित और अरुण वसंत बापट को बरी कर दिया है. 


यह फैसला विशेष ट्रायल कोर्ट द्वारा 2005 में सुनाई गई सजा के खिलाफ दायर की गई अपील पर आया है. अदालत ने अपने आदेश में कहा कि अभियोजन पक्ष साजिश और आरोपियों की सक्रिय भूमिका के संबंध में ठोस और कानूनी रूप से स्वीकार्य साक्ष्य पेश करने में पूरी तरह विफल रहा है, जिसके अभाव में सजा को बरकरार नहीं रखा जा सकता.

विज्ञापन


यह पूरा मामला वर्ष 1994-95 का है, जिसकी जांच सीबीआई ने की थी. सीबीआई का आरोप था कि तत्कालीन सहायक अरुण वसंत बापट ने अन्य आरोपियों के साथ मिलकर एक मृत या बंद हो चुकी पॉलिसी के आधार पर अंजू पंडित नामक महिला के पक्ष में धोखाधड़ी से लोन स्वीकृत कराया था. 


आरोप था कि आरोपियों ने अंबिकापुर से बिलासपुर शाखा में पॉलिसी ट्रांसफर के फर्जी दस्तावेज तैयार किए और जाली हस्ताक्षर के जरिए एलआईसी को आर्थिक नुकसान पहुँचाया. ट्रायल कोर्ट ने साक्ष्यों के आधार पर इन्हें एक वर्ष के कठोर कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई थी, जिसे अब हाईकोर्ट ने पूरी तरह पलट दिया है.


अदालत ने सुनवाई के दौरान पाया कि सीबीआई यह साबित करने में नाकाम रही कि आरोपियों ने एलआईसी की बहुस्तरीय सुरक्षा जांच प्रणाली और सत्यापन के चरणों को कैसे पार किया. आरोपियों के वकील डी.एन. प्रजापति ने दलील दी थी कि हैंडराइटिंग एक्सपर्ट की राय भी अभियोजन के पक्ष में नहीं थी और निचली अदालत ने तथ्यों को नजरअंदाज कर केवल अनुमानों के आधार पर सजा सुनाई थी. 


दूसरी ओर, सीबीआई के वकील ने तर्क दिया था कि आरोपियों ने बंद हो चुकी पॉलिसियों का उपयोग कर धोखाधड़ी से भुगतान प्राप्त किया था. हालांकि, हाईकोर्ट ने माना कि रिकॉर्ड पर मौजूद साक्ष्य आरोपियों के खिलाफ आरोप सिद्ध करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं, जिसके बाद उन्हें सभी आरोपों से बाइज्जत बरी कर दिया गया.

यह खबर शेयर करें: WhatsApp Facebook
CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP