कटघोरा: 52 हाथियों के झुंड ने फसलों को नुकसान पहुंचाया
बिलासपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ के बिलासपुर सर्कल के कटघोरा वन प्रभाग के अंतर्गत कई गांवों में हाथियों का एक झुंड घुस आया, जिससे खड़ी धान की फसलों को व्यापक नुकसान हुआ. हाथियों को लालपुर, परला, नरोई ढोरी और रवांभाठा में देखा गया, जिससे ग्रामीणों में दहशत फैल गई.
विभागीय वन अधिकारी कुमार निशांत ने हाथियों के बीमार होने की अफवाहों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि हाथी स्वस्थ हैं, लेकिन आसान भोजन की तलाश में खेतों में घुस आए. उन्होंने कहा, “एक हाथी को प्रतिदिन 150-200 किलोग्राम भोजन की आवश्यकता होती है. जंगलों में उन्हें इसके लिए कठिन परिश्रम करना पड़ता है, लेकिन कृषि क्षेत्रों में कम मेहनत में प्रचुर मात्रा में भोजन उपलब्ध होता है, यही कारण है कि धान के मौसम में वे अक्सर गांवों में घुस आते हैं.”
डीएफओ ने बताया कि 52 हाथियों का यह झुंड खाने के दौरान चार से पांच गांवों में बिखर जाता है और बाद में फिर से एकत्र हो जाता है. आत्मनगर और केंडई रेंज के गांव विशेष रूप से प्रभावित हुए हैं.
वन विभाग द्वारा रविवार सुबह साझा किए गए एक वीडियो के अनुसार, झुंड को बुदुपानी गांव और कोडवारी रोड के रास्ते रवांभाठा की ओर बढ़ते देखा गया. वीडियो में हाथी परला स्कूल के पास धान की फसलों को खाते हुए दिखाई दिए.
वन विभाग की टीमें ग्रामीणों के सहयोग से हाथियों पर कड़ी नजर रख रही हैं. ग्रामीणों को अपने खेतों से दूर रहने की सलाह दी गई है और लाउडस्पीकर के माध्यम से इसकी घोषणा की जा रही है, ताकि हाथियों को जंगलों में वापस भेजा जा सके.
डीएफओ ने कहा, “यह छत्तीसगढ़ और पूरे देश में धान के मौसम में एक आम घटना है. सभी जानवरों की तरह, हाथी भी आसान भोजन की तलाश करते हैं, जो उन्हें खेतों में मिलता है. ग्रामीणों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है. सौभाग्य से, अब तक कोई हताहत नहीं हुआ है.”
उन्होंने यह भी बताया, “हमारी महिला कर्मचारी मानव-हाथी संघर्ष को कम करने में सबसे आगे हैं. वे हाथियों की गतिविधियों पर नजर रखने, ग्रामीणों में जागरूकता फैलाने और संघर्ष की स्थिति में समुदाय की सुरक्षा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं.”
(फोटो-प्रतीकात्मक)