HC ने आदिवासी विकास विभाग के डिमोशन ऑर्डर पर लगाई रोक
बिलासपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार के उस आदेश पर रोक लगा दी है, जिसमें आदिवासी विकास विभाग के एक अधिकारी को पदोन्नत पद से पदावनत करने का निर्देश दिया गया था. न्यायमूर्ति पी. पी. साहू की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए पाया कि यह कार्रवाई प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत, बिना किसी पूर्व सूचना या नोटिस के की गई थी.
अदालत ने 15 जनवरी को हुई सुनवाई के दौरान राज्य सरकार और अन्य प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है.
मामले के विवरण के अनुसार, याचिकाकर्ता को वर्ष 2008 में सहायक सांख्यिकी अधिकारी के रूप में नियुक्त किया गया था और विभागीय पदोन्नति समिति (DPC) की सिफारिश पर दिसंबर 2022 में उन्हें सहायक अनुसंधान अधिकारी के पद पर पदोन्नत किया गया था.
हालांकि, विभाग के अन्य कर्मचारियों द्वारा दी गई चुनौती और वरिष्ठता सूची की समीक्षा के बाद, 11 दिसंबर 2025 को एक संशोधित डीपीसी आयोजित की गई.
इस समिति ने पदों की कमी का हवाला देते हुए याचिकाकर्ता को उनके मूल पद पर वापस भेजने का निर्णय लिया और 31 दिसंबर 2025 को डिमोशन का आदेश जारी कर दिया.
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता मतीन सिद्दीकी और नरेंद्र मेहर ने तर्क दिया कि अधिकारी दिसंबर 2022 से लगातार अपने पदोन्नत पद पर कार्य कर रही थीं. बिना किसी पूर्व सूचना के उन्हें डिमोट करना कानूनन गलत है.
उच्च न्यायालय ने इन दलीलों को स्वीकार करते हुए डिमोशन ऑर्डर के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी है और मामले की अगली सुनवाई तक अंतरिम राहत प्रदान की है.