छत्तीसगढ़ HC: पेंशन अधिकार है इनाम नहीं, देरी पर 9% ब्याज देने का आदेश
बिलासपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने एक ऐतिहासिक फैसले में स्पष्ट किया है कि पेंशन कोई इनाम नहीं है, बल्कि यह एक कर्मचारी द्वारा वर्षों की सेवा के बाद अर्जित किया गया उसका कानूनी अधिकार है. मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रवींद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने राज्य सरकार की उस अपील को खारिज कर दिया, जिसमें एक सेवानिवृत्त कर्मचारी के परिवार को 23 साल की देरी के बाद मिली पेंशन पर 9 प्रतिशत ब्याज देने के एकल पीठ के आदेश को चुनौती दी गई थी.
अदालत ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि विभाग की अपनी प्रशासनिक अक्षमता या विभागीय कार्यवाही को समय पर पूरा न कर पाने की विफलता का खामियाजा किसी कर्मचारी या उसके परिवार को नहीं भुगतना चाहिए.
यह मामला जल संसाधन विभाग के एक पूर्व कार्यपालन अभियंता आर.जे. अग्रवाल से जुड़ा है, जिनके खिलाफ 1994 में वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगे थे. वे 1995 में सेवानिवृत्त हो गए, लेकिन उनके खिलाफ शुरू की गई जांच दशकों तक लंबित रही.
अंततः 2019 में सरकार ने इस जांच को 'असंभव' मानकर बंद किया और 2023 में जाकर उनके बकाये का भुगतान किया गया.
इस असाधारण देरी पर संज्ञान लेते हुए अदालत ने कहा कि जब भुगतान में अनुचित देरी होती है, तो ब्याज देना न्यायसंगत है.
अदालत ने राज्य की उस दलील को भी दरकिनार कर दिया जिसमें कहा गया था कि नियमों में ब्याज देने का कोई वैधानिक प्रावधान नहीं है.
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि न्याय और समानता के आधार पर उच्च न्यायालय के पास ब्याज देने की अंतर्निहित शक्तियां हैं. यह फैसला नौकरशाही की सुस्ती के खिलाफ एक कड़ा संदेश है कि कर्मचारियों के हक को प्रशासनिक देरी की आड़ में नहीं रोका जा सकता.