HC ने रोड एक्सीडेंट में पैर गंवाने वाली लड़की के मुआवजे को दोगुना किया
बिलासपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने 2019 में एक सड़क हादसे में अपना बायां पैर गंवाने वाली 13 वर्षीय लड़की के लिए मुआवजे की राशि को बढ़ा दिया है. जस्टिस संजय के. अग्रवाल ने 4 सितंबर को दिए गए अपने फैसले में मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण द्वारा दिए गए 9 लाख रुपये के मुआवजे को बढ़ाकर 18,99,062 रुपये कर दिया.
कोर्ट ने निजी बीमा कंपनी को आदेश दिया है कि वह बढ़ी हुई राशि, यानी 9,99,062 रुपये, 9% वार्षिक ब्याज के साथ तीन महीने के भीतर भुगतान करे. यह फैसला दो अपीलों की सुनवाई के दौरान आया. पहली अपील रायपुर के सिलतारा की रहने वाली लड़की ने मुआवजे की राशि बढ़ाने के लिए दायर की थी, जबकि दूसरी अपील बीमा कंपनी ने अपनी जिम्मेदारी से मुक्त होने के लिए दायर की थी.
यह हादसा 26 नवंबर, 2019 को हुआ था, जब छठी कक्षा में पढ़ने वाली लड़की अपने पिता द्वारा चलाई जा रही मोटरसाइकिल से हादसे का शिकार हुई और उसे गंभीर चोटें आईं. रायपुर के दावा अधिकरण ने शुरू में 9 लाख रुपये का मुआवजा तय किया था, जिसे बीमा कंपनी को भुगतान करने का निर्देश दिया गया था.
बीमा कंपनी ने तर्क दिया कि पुलिस ने इस मामले को 'अज्ञात व्यक्ति' के खिलाफ दर्ज किया था और उनका वाहन इसमें शामिल नहीं था. हालांकि, कोर्ट ने दावेदार के बयान पर भरोसा करते हुए, जो हादसे का प्रत्यक्षदर्शी था, बीमा कंपनी की अपील खारिज कर दी.
मुआवजे को बढ़ाते हुए कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के समान मामलों में दिए गए फैसलों का हवाला दिया.
विवाह की संभावनाओं के नुकसान के लिए मुआवजा 1 लाख रुपये से बढ़ाकर 3 लाख रुपये कर दिया गया.
दर्द और पीड़ा के लिए मुआवजा भी 1 लाख रुपये से बढ़ाकर 3 लाख रुपये किया गया, और अक्षमता के लिए मुआवजा 5 लाख रुपये से बढ़ाकर 10,99,062 रुपये कर दिया गया.
अन्य मुआवजों में 1.25 लाख रुपये चिकित्सा खर्च के लिए, 25,000 रुपये भविष्य के चिकित्सा खर्च के लिए, और 50,000 रुपये विशेष आहार, परिवहन, और सहायक शुल्क के लिए शामिल हैं.
कोर्ट ने इन राशियों को बरकरार रखा. कोर्ट का यह फैसला दावा अधिकरण के पहले के आदेश को संशोधित करता है.