छत्तीसगढ़: चार जोडे़ आत्मसमर्पित नक्सलियों की शादी हुई
रायपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ के राजिम में आयोजित एक भव्य सामूहिक विवाह समारोह में सामाजिक परिवर्तन की एक अनूठी तस्वीर देखने को मिली, जहाँ समाज की मुख्यधारा में लौटे चार पूर्व नक्सली जोड़ों ने सात फेरे लेकर अपने नए जीवन की शुरुआत की. मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के तहत आयोजित इस विशाल समारोह में कुल 283 जोड़ों का विवाह संपन्न हुआ, लेकिन आकर्षण का केंद्र वे आत्मसमर्पित नक्सली रहे जिन्होंने हिंसा का रास्ता छोड़कर अब गृहस्थ जीवन को चुना है.
कांकेर, सुकमा और बीजापुर जिले के रहने वाले इन जोड़ों दिलीप व मंजुला, दीपक व सुनीता, कैलाश व रनीता और राजेंद्र व जैनी ने मंत्रोच्चार के बीच एक-दूसरे का हाथ थामा. इन नवदंपतियों ने राज्य सरकार की पुनर्वास नीति और इस कल्याणकारी योजना की सराहना करते हुए कहा कि मुख्यधारा से जुड़ने के बाद उन्हें न केवल सुरक्षा मिली है, बल्कि अब एक खुशहाल भविष्य का सपना भी साकार हो रहा है.
इस ऐतिहासिक अवसर पर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत कर सभी जोड़ों को आशीर्वाद दिया. उन्होंने कहा कि यह योजना जरूरतमंद परिवारों के लिए वरदान है, जिसके तहत प्रति जोड़ा 50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है.
राजिम के नवीन मेला मैदान में संपन्न हुए इस आयोजन में राजिम, बिन्द्रनवागढ़ और कुरूद क्षेत्र के जोड़े शामिल हुए. कलेक्टर बीएस उइके ने कहा कि प्रदेश स्तर पर एक साथ आयोजित हो रहा यह सामूहिक विवाह विश्व रिकॉर्ड के रूप में दर्ज होने जा रहा है. समारोह में विधायक रोहित साहू सहित जिला प्रशासन के आला अधिकारी और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे, जिन्होंने नक्सलियों के आत्मसमर्पण के बाद उनके इस सामाजिक एकीकरण की पहल को प्रदेश की शांति और विकास के लिए एक बड़ा कदम बताया.
इस भव्य समारोह में राजिम विधानसभा क्षेत्र के 94, बिन्द्रनवागढ़ के 181 तथा कुरूद विधानसभा के 8 जोड़े शामिल हुए। राज्य सरकार की इस दूरदर्शी योजना ने आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को नई उम्मीद दी है.
संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि आज के दौर में बेटी की शादी हर परिवार के लिए बड़ी चिंता का विषय बन गई है, लेकिन छत्तीसगढ़ की साय सरकार की मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना ने इसे सुलझा दिया है. इस योजना के तहत प्रति जोड़े 50 हजार रुपये की सहायता दी जाती है, जिसमें 35 हजार रुपये वधु के बैंक खाते में सीधे हस्तांतरित होते हैं. शेष 15 हजार रुपये श्रृंगार सामग्री, व्यवस्था और अन्य खर्चों पर व्यय किए जाते हैं.