छत्तीसगढ़ की तुलना में ओडिशा की किसान पंजीकरण जटिल- जय किसान आंदोलन
बरगढ़ । डेस्क: जय किसान आंदोलन की एक प्रतिनिधि मंडल ने छत्तीसगढ़ में धान उत्पादकों के पंजीकरण की प्रणाली का अध्ययन करने के लिए वहां का दौरा किया. इस दौरे के बाद उन्होंने पाया कि छत्तीसगढ़ की प्रणाली ओडिशा की तुलना में सरल और किसान-अनुकूल है.
प्रतिनिधि मंडल ने छत्तीसगढ़ के चिवरकुता और सागरपाली में प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों का दौरा किया और वहां के किसानों व अधिकारियों से बातचीत की.
जय किसान आंदोलन के नेता सुशील कुमार साहू और हारा बनिया ने बताया कि छत्तीसगढ़ में किसानों को चार महीने की पंजीकरण अवधि दी जाती है, जो आधार-आधारित सरल प्रक्रिया पर आधारित है. इसके अलावा, यदि किसान स्वयं धान बेचने नहीं आ सकते, तो वे अपने प्रतिनिधि को नामित कर सकते हैं.
बनिया ने कहा कि छत्तीसगढ़ में बटाईदार या किरायेदार किसान भी प्राधिकरण के साथ पंजीकरण कर सकते हैं, और यह प्रणाली मुख्य रूप से स्व-घोषणा पर आधारित है, जिसे बाद में अधिकारियों द्वारा सत्यापित किया जाता है.
उन्होंने बताया, “इसके विपरीत, ओडिशा में पंजीकरण की प्रक्रिया कठिन और जटिल है. यहां सभी किसानों को फिर से पंजीकरण कराना पड़ता है, साथ ही फैमिली ट्री प्रमाणपत्र, भूमि रिकॉर्ड में प्रत्येक कानूनी वारिस को शामिल करना, और प्रत्येक शेयरधारक का बायोमेट्रिक और ओटीपी सत्यापन अनिवार्य है. यह संयुक्त परिवारों और प्रवासी सदस्यों के लिए विशेष रूप से मुश्किल है.”
जय किसान आंदोलन के नेताओं ने चेतावनी दी कि दोनों राज्यों में एक ही राजनीतिक दल की सरकार होने के बावजूद, छत्तीसगढ़ ने किसानों के लिए लचीली समयसीमा और परेशानी मुक्त प्रक्रिया को अपनाया है.
उन्होंने मांग की कि ओडिशा सरकार छत्तीसगढ़ के मॉडल को अपनाए, अन्यथा आने वाले दिनों में और तीव्र आंदोलन का सामना करना पड़ सकता है.
18 अगस्त को बीजद की जिला इकाई ने भी इन नियमों को सरल करने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया था.