छत्तीसगढ़: जन्म प्रमाण पत्र तुरंत बनेगा
रायपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ सहित पूरे देश में नवजात को अस्पताल में ही जन्म प्रमाण-पत्र मिल जाया करेगा. भारत के रजिस्ट्रार जनरल द्वारा इस दिशा में आदेश दिया गया है कि पूरे भारत में नवजात के जन्म के बाद मां की अस्पताल से छुट्टी से पहले ही जन्म प्रमाण-पत्र जारी कर दिया जाये.
12 जून 2025 को जारी एक आधिकारिक नोटिस के अनुसार, अब सभी अस्पतालों, विशेष रूप से सरकारी अस्पतालों को यह सुनिश्चित करना होगा कि नवजात की मां को अस्पताल से छुट्टी मिलने से पहले ही जन्म प्रमाण पत्र सौंप दिया जाये. यह कदम जन्म पंजीकरण प्रक्रिया में पारदर्शिता और विश्वास बढ़ाने के लिये उठाया गया है.
यह निर्देश देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए लागू है. सरकारी अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को पहले से ही पंजीकरण इकाइयों के रूप में काम करने के लिए तैयार किया गया है. अब इन इकाइयों के कर्मचारियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जायेगा ताकि वे त्वरित और सटीक रूप से जन्म प्रमाण पत्र जारी कर सकें.
नये निर्देश के तहत, जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण अधिनियम 1969 की धारा 12 के अनुसार, बच्चे के जन्म के तुरंत बाद उसका पंजीकरण करना और 7 दिनों के भीतर इलेक्ट्रॉनिक या अन्य माध्यमों से जन्म प्रमाण पत्र जारी करना अनिवार्य होगा. इस प्रक्रिया को और प्रभावी बनाने के लिये, सभी सरकारी और निजी अस्पतालों को जन्म पंजीकरण इकाइयों के रूप में कार्य करने के लिये प्रशिक्षित किया जायेगा.
रजिस्ट्रार जनरल ने बताया कि यह बदलाव आम लोगों की सुविधा के लिए किया गया है. नोटिस में कहा गया, “जन्म प्रमाण पत्र का महत्व दिन-प्रतिदिन बढ़ रहा है. यह आवश्यक है कि नवजात की मां को अस्पताल से छुट्टी मिलने से पहले यह दस्तावेज़ प्राप्त हो जाये, खासकर सरकारी अस्पतालों में, जहां देश के 50 फीसदी से अधिक संस्थागत जन्म होते हैं.”
2023 में जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण अधिनियम में संशोधन के बाद, 1 अक्टूबर 2023 से सभी संस्थागत जन्मों का पंजीकरण एक केंद्रीय सिविल रजिस्ट्रेशन सिस्टम पोर्टल पर अनिवार्य कर दिया गया है. पहले हर राज्य अपने स्तर पर डेटा तैयार करता था, जिसे बाद में गृह मंत्रालय के साथ साझा किया जाता था. अब यह केंद्रीकृत व्यवस्था वोटर लिस्ट, राशन कार्ड और राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर जैसे महत्वपूर्ण सरकारी रिकॉर्ड को अद्यतन और सटीक रखने में मदद करेगी.
रजिस्ट्रार जनरल ने पाया कि कई सरकारी और निजी अस्पताल जन्म प्रमाण पत्र से जुड़े कानूनी दायित्वों का पालन नहीं कर रहे थे. 17 मार्च 2025 को जारी एक नोटिस में खुलासा हुआ था कि लगभग 10 फीसदी जन्म पंजीकृत नहीं हो रहे थे. इसके अलावा, अस्पतालों को 21 दिनों के भीतर जन्म और मृत्यु से संबंधित डेटा साझा करने का निर्देश दिया गया था. नये नियमों के तहत, इस प्रक्रिया को और सख्त किया गया है ताकि कोई भी जन्म पंजीकरण से वंचित न रहे.