छत्तीसगढ़: बिलासपुर ट्रेन हादसा, प्रारंभिक जांच में पायलट जिम्मेदार
बिलासपुर । संवाददाता: बिलासपुर के पास 4 नवंबर को हुए भयानक ट्रेन हादसे की प्रारंभिक जांच पूरी हो चुकी है. जिसमें सीनियर रेलवे अधिकारियों की टीम ने पाया कि पैसेंजर ट्रेन के चालक ने खतरे के संकेतक को नजरअंदाज कर दिया था. इस 'सिग्नल पास्ड एट डेंजर' (“Signal Passed At Danger” ) श्रेणी के हादसे में एक मालगाड़ी से टक्कर होने से 11 यात्रियों की जान चली गई, जबकि कई अन्य जख्मी हो गए.
ट्रेन नंबर 68733 (गेवरा रोड-बिलासपुर) मेमू पैसेंजर गाड़ी तेज रफ्तार में दौड़ रही थी, जब लोको पायलट विद्या सागर और उनके सहायक ने गलत संकेतक पर भरोसा कर गति बढ़ा ली.
डेटा लॉगर के अनुसार, ट्रेन की स्पीड 45 किमी/घंटा से बढ़कर 76 किमी/घंटा हो गई थी, लेकिन टक्कर के वक्त इमरजेंसी ब्रेक लगाने पर यह घटकर 48 किमी/घंटा रह गई. विद्या सागर की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि सहायक को गंभीर चोटें आईं और वह बयान देने की हालत में नहीं थी.
ऑल इंडिया लोको रनिंग स्टाफ एसोसिएशन के जोनल सेक्रेटरी वी.के. तिवारी ने इसे सूरज की चकाचौंध और कर्व वाले इलाके में सिग्नल भ्रम का मामला बताया.
उन्होंने कहा कि मेमू ट्रेनों में आमतौर पर एक ही पायलट होता है, लेकिन यहां सहायक की तैनाती इसलिए की गई क्योंकि मुख्य पायलट ने एप्टीट्यूड टेस्ट पास नहीं किया था. एसोसिएशन ने तत्काल पायलटों पर दोषारोपण का विरोध किया और सीआरएस को अपनी चिंताएं बताईं.
दक्षिण-पूर्वी सर्कल, कोलकाता के रेलवे सेफ्टी आयुक्त बी.के. मिश्रा ने हादसे की अनिवार्य जांच समाप्त कर दी है. रिपोर्ट में स्पष्ट कहा गया कि चालक मंडल ने खतरे के सिग्नल पर ट्रेन को नियंत्रित करने में चूक की, जिससे मालगाड़ी के ब्रेक वैन से जोरदार धक्का लगा. रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, चालक ही इस दुर्घटना के लिए पूरी तरह जिम्मेदार हैं.