छत्तीसगढ़: पूर्व सीएम भूपेश बघेल का EOW-ACB पर तीखा प्रहार
रायपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने शनिवार को राज्य की प्रमुख जांच एजेंसियों EOW और ACB पर बेहद गंभीर इल्जाम लगाए. उनका कहना है कि ये संस्थाएं न्याय की प्रक्रिया को कमजोर करने के लिए फर्जी सबूतों और बयानों का सहारा ले रही हैं, जो लोकतंत्र की जड़ों को हिला सकता है.
बघेल ने चेतावनी दी कि यदि ऐसी कारगुजारी जारी रही, तो न्याय व्यवस्था का पूरा ढांचा धराशायी हो जाएगा. उन्होंने इस मामले में स्वतंत्र जांच की मांग भी उठाई है.
बघेल ने खुलासा किया कि कोयला घोटाले के आरोपी सूर्यकांत तिवारी की जमानत याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान यह साजिश उजागर हुई. सह-आरोपी निखिल चंद्राकर का धारा 164 (अब बीएनएस की धारा 183) के तहत दर्ज बयान, जो गोपनीय रहना चाहिए था, को खुलेआम अदालत में पेश कर दिया गया.
पूर्व सीएम ने इसे न्याय के सिद्धांतों पर सीधा हमला बताया और कहा कि इससे अदालतों की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो गए हैं.
इस घटना से जुड़े एक और चौंकाने वाले तथ्य पर बघेल ने रोशनी डाली. 30 सितंबर 2025 को रायपुर की एक अदालत में दो अलग-अलग केसों में बयान दर्ज हो रहे थे. जांच एजेंसियों ने एक ही पेन ड्राइव का इस्तेमाल किया, जिसमें पहले से टाइपेड बयान लोड थे. आरोपी बस सिर हिलाकर सहमति जता रहे थे.
इस अनियमितता पर तीन वरिष्ठ वकीलों ने डीजे कोर्ट में औपचारिक शिकायत की.
बघेल ने आगे आरोप लगाया कि EOW ने अदालत में पेश दस्तावेजों में हेरफेर की.
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के स्पष्ट आदेश के बावजूद, जहां सभी दस्तावेजों का फॉन्ट एकसमान होना चाहिए, वहां बयानों के फॉन्ट अलग-अलग पाए गए. उन्होंने इसे आपराधिक कृत्य करार दिया और कहा कि इससे एजेंसियों व कुछ स्थानीय अदालतों के बीच गठजोड़ साफ झलकता है.
बघेल ने जोर देकर कहा कि ऐसी प्रक्रियाओं से न केवल व्यक्तिगत न्याय प्रभावित होता है, बल्कि पूरे लोकतांत्रिक ताने-बाने को खतरा पैदा हो जाता है.