सुपेबेड़ा में किडनी रोग से एक और मौत, अब तक 133 ग्रामीणों ने गंवाई जान
गरियाबंद । डेस्क: छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले का सुपेबेड़ा गांव में किडनी की गंभीर बीमारी से जूझ रहे 49 वर्षीय प्रेमजय क्षेत्रपाल की रायपुर एम्स में उपचार के दौरान मौत हो गई है. इस दुखद घटना के साथ ही साल 2005 से अब तक इस गांव में किडनी जनित रोगों से जान गंवाने वालों की संख्या बढ़कर 133 हो गई है, जो क्षेत्र में गहराते स्वास्थ्य संकट की भयावह तस्वीर पेश करती है.
मृतक प्रेमजय बीते पांच वर्षों से पेरिटोनियल डायलिसिस के सहारे जीवन यापन कर रहे थे, लेकिन हाल ही में डायलिसिस फिस्टुला में आई तकनीकी खराबी उनके लिए जानलेवा साबित हुई.
बताया जा रहा है कि उनके परिवार की स्थिति और भी हृदयविदारक है, जहां उनके माता-पिता और भाई समेत आठ सदस्य पहले ही इसी बीमारी की भेंट चढ़ चुके हैं. बीएमओ प्रकाश साहू ने इस मौत की पुष्टि की है.
सुपेबेड़ा की जमीनी हकीकत सरकारी दावों और आंकड़ों के बीच झूल रही है. जहां पंचायत रिकॉर्ड 133 मौतों की गवाही दे रहे हैं, वहीं सरकारी आंकड़ों में यह संख्या महज 70 से 80 के बीच सिमटी हुई है.
वर्तमान में भी गांव के 40 से अधिक ग्रामीण इस बीमारी की चपेट में हैं, जिनमें से कई अन्य राज्यों में इलाज कराने को मजबूर हैं.
विडंबना यह है कि प्रशासन की ओर से भेजी गई डायलिसिस मशीनें आज भी धूल फांक रही हैं और गांव के लिए स्वीकृत प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का भवन अब तक अस्तित्व में नहीं आ पाया है.
स्वास्थ्य सुविधाओं के नाम पर गांव में नेफ्रोलॉजी विशेषज्ञ का अभाव है और शुद्ध पेयजल की योजनाएं भी फाइलों में दबी हुई हैं. स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि बीमारी के खौफ और प्रशासनिक उपेक्षा के चलते ग्रामीणों ने अब स्वास्थ्य जांच तक कराना बंद कर दिया है.