छत्तीसगढ़: बीजापुर में एक दशक बाद खुले 37 बंद स्कूल
बीजापुर । संवाददाता: देश में नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई में लंबे समय तक अग्रिम राज्य रहे छत्तीसगढ़ में अब शांति और विकास की नई सुबह देखी जा रही है. केंद्र सरकार द्वारा राज्यों को नक्सल मुक्त घोषित किए जाने के बाद, पहली बार यहां के छात्र बिना किसी डर और भय के माहौल में स्कूलों में दाखिला ले रहे हैं. इस बदलाव को और मजबूत करने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार ने एक विशेष पहल शुरू की है, जिसके तहत बच्चों को स्कूल भेजने और विशेष रूप से बेटियों को नियमित रूप से शिक्षा से जोड़ने के लिए अभिभावकों को प्रोत्साहित किया जा रहा है.
इसी कड़ी में बीजापुर के सुदूर और वन क्षेत्रों में, जो कभी नक्सलियों का गढ़ माने जाते थे, एक दशक से अधिक समय से बंद पड़े 37 स्कूलों को दोबारा खोलने के लिए 'शाला प्रवेश उत्सव' का आयोजन किया गया. इस जिला स्तरीय भव्य कार्यक्रम का आयोजन एजुकेशन सिटी में किया गया, जिसमें सांसद महेश कश्यप ने नव-प्रवेशित बच्चों का स्वागत किया और उन्हें उज्ज्वल भविष्य का भरोसा दिलाया.
सांसद कश्यप ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि इन स्कूलों के दोबारा खुलने से दूर-दराज और जंगलों में रहने वाले बच्चों को उनके गांवों के पास ही शिक्षा के अवसर मिलेंगे. अब उन्हें पढ़ाई के लिए लंबी और जोखिमभरी दूरी तय नहीं करनी पड़ेगी.
साथ ही, बीच में पढ़ाई छोड़ चुके बच्चों को भी फिर से शिक्षा की मुख्यधारा में लाया जाएगा. उन्होंने शिक्षा को समाज और राष्ट्र के विकास की मजबूत नींव बताते हुए शिक्षकों से पूरी निष्ठा के साथ गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने की अपील की. कार्यक्रम के दौरान उत्कृष्ट कार्य करने वाले शिक्षकों और मेधावी छात्रों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित भी किया गया.
बेटियों की शिक्षा और बुनियादी सुविधाओं पर विशेष ध्यान
इस मुहिम में जिला प्रशासन का सबसे ज्यादा ध्यान बालिकाओं की शिक्षा पर है. जिला पंचायत मुख्य कार्यपालन अधिकारी नम्रता चौबे ने कहा कि प्रशासन हर बच्चे को शैक्षणिक अवसरों से जोड़ने के लिए प्रतिबद्ध है. वहीं, जिला पंचायत अध्यक्ष जानकी कोरसाम ने लड़कियों की शिक्षा पर विशेष जोर देते हुए माता-पिता से अपनी बेटियों को रोजाना स्कूल भेजने की अपील की.
अब केंद्र सरकार के 'नक्सल-मुक्त भारत अभियान' के तहत बंद पड़े स्कूलों का दोबारा खुलना इस क्षेत्र के आदिवासियों और बच्चों के मौलिक अधिकारों को वापस दिलाने की दिशा में एक ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण कदम साबित हो रहा है.
इस गौरवपूर्ण अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष जानकी कोरसाम, नगरपालिका अध्यक्ष गीता सोम पुजारी, जिला पंचायत उपाध्यक्ष पुलैया पारस, नगरपालिका उपाध्यक्ष भुवन सिंह चौहान सहित जिला प्रशासन, शिक्षा विभाग के अधिकारी, शिक्षक, छात्र और बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण मौजूद रहे.