छत्तीसगढ़: फैक्ट्री से 20 बाल मजदूर मुक्त कराये गये
रायपुर । संवाददाता: 'विश्व बाल श्रम निषेध दिवस' के मौके पर छत्तीसगढ़ में एक बड़े प्रशासनिक एक्शन के तहत 20 बाल मजदूरों को खतरनाक फैक्ट्रियों और रेलवे स्टेशनों से रेस्क्यू किया गया है. छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा के नेतृत्व में रायपुर और बिलासपुर में अलग-अलग जगहों पर ये छापेमारी की गई, जिससे बाल श्रम कराने वाले संचालकों में हड़कंप मच गया.
आयोग की टीम ने रायपुर के उरला औद्योगिक क्षेत्र में स्थित 'मारुति नंदन स्ट्रक्चर इंडस्ट्रीज' नामक लोहे की फैक्ट्री में औचक दबिश दी. निरीक्षण के दौरान पाया गया कि नाबालिग बच्चों से बेहद खतरनाक और जानलेवा काम कराया जा रहा था. टीम ने मौके से तुरंत 9 बच्चों को अपनी सुरक्षा में लिया.
इसके अलावा रेलवे पुलिस फोर्स (RPF) ने बिलासपुर में 7 बच्चों और शासकीय रेलवे पुलिस (GRP) ने रायपुर में 4 बच्चों को रेस्क्यू किया. इन सभी बच्चों को बाल कल्याण समिति (CWC) के समक्ष पेश किया गया है.
शुरुआती जांच में सामने आया है कि रेस्क्यू किए गए सभी बच्चे ओडिशा, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल जैसे अन्य राज्यों के रहने वाले हैं. इन्हें बिहार के एक ठेकेदार के जरिए रायपुर लाया गया था.
प्रशासनिक अधिकारी अब इस मामले में बड़े बाल तस्करी (चाइल्ड ट्रैफिकिंग) रैकेट की आशंका को ध्यान में रखकर गहराई से तफ्तीश कर रहे हैं.
इस बड़ी कार्रवाई के बाद आरोपियों के खिलाफ किशोर न्याय (बालकों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम, 2015 की धारा 75, 79 और 143 के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है. इसके साथ ही बाल श्रम निषेध अधिनियम और मानव तस्करी से जुड़ी सख्त धाराओं के तहत भी कानूनी कदम उठाए जा रहे हैं.
आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने सख्त लहजे में कहा कि बच्चों को खतरनाक उद्योगों में धकेलना उनके अधिकारों का घोर उल्लंघन है. हर बच्चे को सुरक्षित बचपन और शिक्षा का अधिकार है. बाल श्रम और तस्करी जैसी सामाजिक बुराइयों के खिलाफ आयोग पूरी संवेदनशीलता से काम कर रहा है और दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा.
इस रेस्क्यू ऑपरेशन में जिला बाल संरक्षण अधिकारी संजय निराला और श्रम विभाग के अधिकारियों ने अहम भूमिका निभाई.