छत्तीसगढ़ में 1,065 मासूम हाथों में शिक्षा की जगह कटोरा
रायपुर । संवाददाता: सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय की नवीनतम रिपोर्ट ने राज्य में बाल भिक्षावृत्ति की एक विचलित करने वाली तस्वीर पेश की है, जिसके अनुसार प्रदेश में 14 वर्ष से कम उम्र के 1,065 बच्चे भीख मांगने को मजबूर हैं. यह आंकड़ा न केवल राज्य के सामाजिक ढांचे पर सवाल खड़े करता है, बल्कि उन मासूमों के शिक्षा और सुरक्षा के मौलिक अधिकारों के हनन को भी दर्शाता है.
रिपोर्ट के अनुसार, छत्तीसगढ़ की स्थिति पड़ोसी राज्य ओडिशा (905 मामले) से भी बदतर है, हालांकि मध्य प्रदेश (2,592 मामले) की तुलना में यहां संख्या कम है.
राष्ट्रीय स्तर पर कुल 45,296 बच्चे इस गंभीर स्थिति में पाए गए हैं, जिनमें उत्तर प्रदेश 10,167 बच्चों के साथ शीर्ष पर है.
केंद्र सरकार ने बताया कि अक्टूबर 2023 से अब तक देश भर में 2,653 बच्चों का पुनर्वास किया गया है, जिनमें से 1,507 को उनके परिवारों से मिलाया गया और 635 को स्कूलों में प्रवेश दिलाया गया.
हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि छत्तीसगढ़ में पलायन, अत्यधिक गरीबी और निगरानी तंत्र की कमी के कारण बच्चे इस दलदल में फंस रहे हैं.
बाल कल्याण कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि यदि जमीनी स्तर पर पहचान अभियान और परिवारों को आर्थिक सहायता देने जैसे कड़े कदम नहीं उठाए गए, तो इन बच्चों का शोषण और भविष्य का अंधकार और गहरा हो सकता है.