इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच युद्धविराम की घोषणा
नई दिल्ली । डेस्क: अमेरिका के एक वरिष्ठ अधिकारी ने पुष्टि की है कि लेबनान में इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच युद्धविराम पर सहमति बन गई है. यह समझौता शुक्रवार को स्थानीय समयानुसार दोपहर करीब 4:00 बजे (भारतीय समयानुसार शाम 7:30 बजे) से प्रभावी हो गया है. हाल ही में दोनों पक्षों के बीच भड़की भारी हिंसा के बाद इस शांति समझौते को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि लेबनान में जारी इस संघर्ष के कारण ईरान के साथ चल रही व्यापक शांति वार्ता और अंतरिम समझौते पर संकट के बादल मंडराने लगे थे.
अमेरिकी अधिकारी के अनुसार, आज तड़के दोनों ओर से हुई भीषण गोलाबारी के बाद अब स्थिति नियंत्रण में है और युद्धविराम लागू हो चुका है. इस समझौते को धरातल पर लाने के लिए अमेरिका और कतर के राजनयिकों ने ईरान के सहयोग से मध्यस्थ की भूमिका निभाई है.
इससे पहले लेबनान में हुए हवाई हमलों में 18 लोगों की जान चली गई थी, जबकि हिजबुल्लाह के हमले में चार इजरायली सैनिक मारे गए थे. इस ताजा हिंसा के कारण स्विट्जरलैंड में शुक्रवार को होने वाली अमेरिका-ईरान वार्ता को भी रद्द करना पड़ा था, जिससे वैश्विक व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण 'स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज' मार्ग को फिर से खोलने की कोशिशों को झटका लगा था.
राजनयिक विशेषज्ञों का मानना है कि लेबनान में शांति स्थापित होना अमेरिका-ईरान समझौते की एक अनिवार्य शर्त है. हिजबुल्लाह के एक वरिष्ठ सांसद ने भी स्पष्ट किया था कि ईरान ने साफ कर दिया है कि पूर्ण युद्धविराम के बिना अमेरिका के साथ बातचीत आगे नहीं बढ़ सकती.
हालांकि, ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने सीधी बातचीत पर तो कोई टिप्पणी नहीं की, लेकिन लेबनान पर हुए हमलों के लिए अमेरिका को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि तेहरान अपने हितों की रक्षा के लिए सभी जरूरी कदम उठाएगा.
इस युद्धविराम के बाद अब मध्य पूर्व में लंबे समय से जारी तनाव के घटने और वैश्विक जहाजरानी मार्ग के दोबारा सुरक्षित होने की उम्मीदें एक बार फिर जग गई हैं.
हिजबुल्लाह (Hezbollah) कौन हैं ?
हिजबुल्लाह (Hezbollah) लेबनान का एक प्रमुख शिया मुस्लिम राजनीतिक दल और सशस्त्र अर्धसैनिक संगठन है, जिसका शाब्दिक अर्थ 'अल्लाह का दल' (Party of God) होता है. इसकी स्थापना 1980 के दशक की शुरुआत में, मुख्य रूप से 1982 में इजरायल द्वारा लेबनान पर किए गए आक्रमण और कब्जे का मुकाबला करने के लिए हुई थी.
इस संगठन के गठन, प्रशिक्षण और वित्तीय पोषण में ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, और आज भी यह ईरान के 'एक्सिस ऑफ रेजिस्टेंस' (Axis of Resistance) यानी प्रतिरोध के अक्ष का एक सबसे शक्तिशाली और मुख्य हिस्सा माना जाता है.
वैचारिक रूप से हिजबुल्लाह ईरान के इस्लामी शासन मॉडल और अयातुल्ला खुमैनी के सिद्धांतों का अनुयायी है. स्थापना के बाद से ही इसने खुद को इजरायल विरोधी और पश्चिम विरोधी आंदोलन के रूप में स्थापित किया.
लेबनान के भीतर हिजबुल्लाह केवल एक लड़ाकू समूह नहीं है, बल्कि एक मजबूत राजनीतिक और सामाजिक ताकत भी है. इसके पास लेबनानी संसद में सीटें हैं, यह सरकार का हिस्सा रहा है, और देश के शिया बहुल इलाकों में अस्पतालों, स्कूलों और सामाजिक कल्याणकारी योजनाओं का एक व्यापक नेटवर्क चलाता है, जिसके कारण इसे स्थानीय आबादी के एक बड़े वर्ग का समर्थन प्राप्त है.
सैन्य क्षमता के मामले में हिजबुल्लाह को दुनिया के सबसे शक्तिशाली गैर-राज्य सशस्त्र बलों (Non-state armed groups) में गिना जाता है. इसके पास एक नियमित सेना की तरह हजारों प्रशिक्षित लड़ाके, उन्नत मिसाइलें, ड्रोन और अत्याधुनिक हथियार मौजूद हैं, जो इसे लेबनान की आधिकारिक सेना से भी अधिक ताकतवर बनाते हैं.
इजरायल और अमेरिका सहित कई पश्चिमी और अरब देश हिजबुल्लाह को एक आतंकवादी संगठन मानते हैं, जबकि इसके समर्थक इसे एक वैध प्रतिरोध आंदोलन के रूप में देखते हैं जो लेबनानी संप्रभुता की रक्षा करता है.
मध्य पूर्व की भू-राजनीति में हिजबुल्लाह एक अत्यंत प्रभावशाली कारक है, जिसकी गतिविधियां सीधे तौर पर क्षेत्रीय शांति, वैश्विक सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा व्यापार मार्गों को प्रभावित करती हैं.