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क्या नाटो अमेरिका के बिना जीवित रह सकता है?

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10 अप्रै. 2026, 06:45 PM 4 मिनट में पढ़ें 1

NATO
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नई दिल्ली । डेस्क: डोनाल्ड ट्रंप के नाटो सहयोगियों के प्रति बढ़ते तिरस्कार और हालिया वैश्विक संकटों ने इस ऐतिहासिक सैन्य गठबंधन के अस्तित्व पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है. ट्रंप का नाटो के प्रति असंतोष उनके राष्ट्रपति बनने से पहले का है, जो रक्षा खर्च में कमी से शुरू होकर ग्रीनलैंड जैसे क्षेत्रों पर नियंत्रण की विवादास्पद इच्छा तक फैला हुआ है. 


हालांकि, विशेषज्ञों का मानना ​​है कि ईरान के खिलाफ युद्ध में अमेरिकी रुख का समर्थन न करने के यूरोपीय देशों के फैसले ने इस दरार को उस स्तर पर पहुंचा दिया है जो पहले कभी नहीं देखा गया था. ट्रंप ने इस समर्थन की कमी को नाटो पर एक "कभी न मिटने वाला कलंक" बताया है, जबकि जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ ने इसे "ट्रांस-अटलांटिक स्ट्रेस टेस्ट" करार दिया है. 


विश्लेषकों के अनुसार, नाटो अब एक ऐसे मोड़ पर है जहां से "सामान्य कामकाज" की वापसी असंभव लगती है. जिम टाउनसेंड जैसे विशेषज्ञों का मानना ​​है कि गठबंधन टूटने के अब तक के सबसे करीब है.


हालांकि अमेरिकी कानून के तहत राष्ट्रपति ट्रंप अपनी इच्छा मात्र से नाटो से बाहर नहीं निकल सकते, क्योंकि इसके लिए कांग्रेस के अधिनियम या सीनेट के दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होती है, जिसकी संभावना फिलहाल कम है. 


लेकिन ट्रंप के पास गठबंधन को भीतर से कमजोर करने के अन्य प्रभावी तरीके हैं. संधि का अनुच्छेद 5 सामूहिक रक्षा की बात तो करता है, लेकिन यह किसी सैन्य प्रतिक्रिया के लिए अमेरिका को बाध्य नहीं करता. यदि वाशिंगटन केवल यह संदेह पैदा कर दे कि वह हमले की स्थिति में सहयोगियों की मदद नहीं करेगा, तो नाटो की विश्वसनीयता समाप्त हो जाएगी. 


इसके अतिरिक्त, अमेरिका यूरोप में तैनात अपने लगभग 84,000 सैनिकों को हटा सकता है या उन देशों से सैन्य अड्डे स्थानांतरित कर सकता है जिन्हें वह "अनुपयोगी" मानता है. पूर्व इतालवी राजदूत स्टेफानो स्टेफनी के अनुसार, ट्रंप को नाटो छोड़ने की जरूरत नहीं है; केवल यह कहना कि वह गठबंधन छोड़ सकते हैं, इसकी प्रभावशीलता को खत्म करने के लिए काफी है.


इस खतरे को देखते हुए यूरोपीय देशों ने अपनी रक्षा क्षमताओं में निवेश बढ़ाना शुरू कर दिया है. 2020 से 2025 के बीच सदस्य देशों के रक्षा व्यय में 62 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई है. 

इसके बावजूद, यूरोप आज भी गहरी मार करने वाली मिसाइलों, अंतरिक्ष-आधारित खुफिया तंत्र, रसद और हवाई रक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में पूरी तरह अमेरिका पर निर्भर है. 


इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रेटेजिक स्टडीज (IISS) की रिपोर्ट बताती है कि इन कमियों को भरने के लिए यूरोप को कम से कम 1 ट्रिलियन डॉलर और एक दशक से अधिक समय की आवश्यकता होगी. सैन्य भर्ती और उत्पादन की धीमी गति इस चुनौती को और कठिन बना देती है.


रूस की ओर से बढ़ता खतरा इस समयसीमा को और भी कम कर देता है. अनुमानों के अनुसार, रूस 2027 से 2029 के बीच नाटो क्षेत्रों पर हमला करने की स्थिति में हो सकता है. 


ऐसे में सवाल उठता है कि क्या नाटो अमेरिका के बिना टिक पाएगा? 


कुछ विश्लेषकों का मानना ​​है कि नाटो अब यूरोपीय देशों के बीच सैन्य सहयोग का एक ढांचा बन चुका है, इसलिए यह एक "यूरोपीय नाटो" के रूप में जीवित रह सकता है, भले ही इसका स्वरूप बदल जाए. 


वहीं, स्टेफानो स्टेफनी का तर्क है कि नाटो ने हमेशा अमेरिकी हितों की भी रक्षा की है, जैसा कि 9/11 के बाद अफगानिस्तान युद्ध में देखा गया था. 


अंततः, यदि अमेरिका पीछे हटता है, तो यह केवल यूरोप के लिए नहीं बल्कि अमेरिका के अपने रणनीतिक हितों के लिए भी एक बड़ा नुकसान होगा. नाटो का भविष्य अब इस बात पर निर्भर है कि यूरोप कितनी जल्दी अपनी आत्मनिर्भरता हासिल करता है और अमेरिका अपनी वैश्विक भूमिका को किस नजरिए से देखता है.


गौरतलब है कि उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (NATO) में वर्तमान में 32 सदस्य देश शामिल हैं. फिनलैंड (2023) और स्वीडन (2024) इस गठबंधन के सबसे नए सदस्य हैं.


इन देशों की सूची उनके शामिल होने के वर्ष के अनुसार नीचे दी गई है:


संस्थापक सदस्य (1949)

इन 12 देशों ने वाशिंगटन संधि पर हस्ताक्षर करके नाटो की शुरुआत की थी:


अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम (ब्रिटेन), फ्रांस, कनाडा, इटली, नीदरलैंड, बेल्जियम, नॉर्वे, पुर्तगाल, डेनमार्क, आइसलैंड और लक्ज़मबर्ग.


अन्य सदस्य- 1952 में : यूनान (ग्रीस), तुर्की, 1955 में : जर्मनी (उस समय पश्चिम जर्मनी के रूप में), 1982 में: स्पेन, 1999 में: चेक गणराज्य, हंगरी, पोलैंड, 2004 में: बुल्गारिया, एस्टोनिया, लातविया, लिथुआनिया, रोमानिया, स्लोवाकिया, स्लोवेनिया, 2009 में: अल्बानिया, क्रोएशिया, 2017 में: मोंटेनेग्रो, 2020 में: उत्तर मैसेडोनिया, 2023 में: फिनलैंड और 2024 में: स्वीडन.


नाटो का मुख्य कार्यालय ब्रुसेल्स, बेल्जियम में स्थित है. इस गठबंधन का मुख्य सिद्धांत 'सामूहिक रक्षा' है, जिसका अर्थ है कि किसी एक सदस्य देश पर हमला होने पर सभी सदस्य देश उसकी सहायता के लिए आगे आएंगे.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP