'विधायक कॉलोनी' के लिये 80 से ज्यादा मकानों पर चला बुलडोज़र
रायपुर । संवाददाता: नवा रायपुर विकास प्राधिकरण (NRDA) के लेयर-2 क्षेत्र में आने वाले नकटी गांव में उस समय भारी हंगामा खड़ा हो गया, जब प्रशासनिक अमले ने पुलिस बल और जेसीबी मशीनों के बड़े बेड़े के साथ मिलकर 80 से अधिक मकानों को मलबे में तब्दील कर दिया. यह पूरी कार्रवाई एक प्रस्तावित 'विधायक कॉलोनी' के निर्माण के लिए की गई है.
इस अचानक हुई तोड़फोड़ की वजह से दर्जनों गरीब परिवार बेघर हो गए हैं, जिसके बाद उग्र ग्रामीणों और पुलिस के बीच तीखी झड़पें और धक्का-मुक्की देखने को मिली.
स्थानीय प्रशासन का दावा है कि ये तमाम निर्माण सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा करके किए गए थे. हालांकि, प्रभावित ग्रामीणों का कहना है कि इनमें से कुछ मकान तो दशकों पुराने हैं और उन्हें 'प्रधानमंत्री आवास योजना' (PMAY) जैसी सरकारी कल्याणकारी योजनाओं के तहत ही बनाया गया था.
कार्रवाई के दौरान जब बुलडोज़रों ने घरों को ढहाना शुरू किया, तो वहां मौजूद महिलाएं बिलख-बिलख कर रोने लगीं. बेबसी और गुस्से से भरे ग्रामीणों ने जब इस कार्रवाई को रोकने के लिए प्रशासनिक गाड़ियों का रास्ता रोकने की कोशिश की, तो पुलिस के साथ उनकी सीधी शारीरिक झड़प हो गई.
इस संवेदनशील मुद्दे पर अब छत्तीसगढ़ की सियासत भी पूरी तरह गरमा गई है. मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने कार्रवाई के समय को लेकर राज्य सरकार को आड़े हाथों लिया है. पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इस मामले को लेकर सत्ताधारी भाजपा के भीतर चल रही खींचतान पर सीधा सियासी तंज कसा.
बघेल ने कहा कि रायपुर के भाजपा सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने मानसून के दौरान किसी भी तरह की तोड़फोड़ न करने का भरोसा दिया था, लेकिन प्रशासन ने उनके इस वादे को दरकिनार कर दिया.
पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और सांसद बृजमोहन अग्रवाल के बीच आपसी समन्वय की भारी कमी है, जिसका खामियाजा इन मासूम ग्रामीणों को भुगतना पड़ रहा है.
दूसरी तरफ, ग्रामीणों के भारी आक्रोश और बेघर हुए लोगों के संकट को देखते हुए प्रशासन ने आनन-फानन में एक पुनर्वास पैकेज की घोषणा की है. प्रशासनिक अधिकारियों के मुताबिक, बेघर हुए परिवारों के जब्त किए गए घरेलू सामान को सुरक्षित रूप से नवा रायपुर स्थित आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के लिए बनी एक आवासीय कॉलोनी में भेजा जा रहा है.
अधिकारियों का दावा है कि इस तोड़फोड़ से प्रभावित हुए सभी परिवारों को इसी ईडब्ल्यूएस कॉलोनी में वैकल्पिक तौर पर स्थायी आवास आवंटित किए जाएंगे.