7 साल के मासूम से दरिंदगी, 62 साल के बुजुर्ग को 20 साल की सख्त सजा
जशपुर । संवाददाता: जशपुर जिले के कांसाबेल इलाके में 7 साल की बच्ची के साथ हुई दरिंदगी के मामले में फास्ट ट्रैक कोर्ट ने ऐतिहासिक तेजी दिखाते हुए महज 40 दिनों के भीतर न्याय सुनाया है. अपर सत्र न्यायाधीश जनार्दन खरे की अदालत ने 62 वर्षीय आरोपी विनोद एक्का उर्फ जशपुरिया को दोषी ठहराते हुए 20 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है, साथ ही उस पर जुर्माना भी लगाया है.
अदालत ने पॉक्सो एक्ट और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संगीन धाराओं के तहत यह सख्त फैसला सुनाया है, जिसके तहत जुर्माने की राशि अदा न करने पर आरोपी को अतिरिक्त समय जेल में बिताना होगा.
यह दिल दहला देने वाली वारदात 9 अगस्त की शाम को घटी थी, जब गांव के एक घर में बैठकर टीवी देख रही मासूम को आरोपी रोटी खिलाने का झांसा देकर अपने साथ ले गया. आरोपी ने अपने घर का दरवाजा अंदर से बंद कर लिया था.
जब बच्ची काफी देर तक घर नहीं लौटी, तो चिंतित परिजनों ने उसकी खोजबीन शुरू की. इसी दौरान गांव के ही एक व्यक्ति ने आरोपी के घर की खिड़की से अंदर का मंजर देखकर मुस्तैदी दिखाई और मासूम को सुरक्षित बाहर निकाला.
अगले दिन जब मां ने बच्ची से दुलार से पूछा तो उसने अपने साथ हुई हैवानियत की पूरी सच्चाई बयां कर दी. इसके बाद परिजनों ने बिना देरी किए पुलिस से संपर्क किया और पीड़िता के पिता की तहरीर पर 13 अगस्त को कांसाबेल थाने में मामला दर्ज कराया गया.
थाना प्रभारी जितेंद्र कुमार ताम्रकार के नेतृत्व में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए पीड़िता व आरोपी का मेडिकल कराया, घटनास्थल का नक्शा तैयार किया और पुख्ता सबूत जुटाए.
पुलिस की मुस्तैदी का ही नतीजा था कि घटना के कुछ ही दिनों के भीतर 2 सितंबर को कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी गई. विशेष लोक अभियोजक अनुपम कुमार तिर्की ने अभियोजन पक्ष का मजबूती से प्रतिनिधित्व किया.
अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए पीड़िता समेत कुल 13 गवाहों के बयान और पेश किए गए चिकित्सीय व दस्तावेजी साक्ष्यों को ध्यान में रखा. ठोस सबूतों के आधार पर अदालत ने आरोपी को कड़ा सबक सिखाते हुए जेल भेजने का आदेश दिया.