शराब घोटालाः झारखंड से लाए दोनों कारोबारी 8 दिन EOW की रिमांड पर
रायपुर | संवाददाताः झारखंड में शराब घोटाले में गिरफ्तार छत्तीसगढ़ के दो शराब कारोबारी अतुल सिंह और मुकेश मनचंदा को ट्रांजिट रिमांड पर लाकर शुक्रवार को रायपुर न्यायालय में पेश किया गया.
कोर्ट ने दोनों को 8 दिनों के लिए ईओडब्ल्यू की रिमांड पर भेज दिया है. अब 6 सितंबर तक ईओडब्ल्यू के अधिकारी दोनों से पूछताछ करेंगे.
छत्तीसगढ़ के रहने वाले शराब कारोबारी अतुल सिंह और मुकेश मनचंदा ओम साई बेवरेज के निदेशक हैं. दोनों पर छत्तीसगढ़ में शराब व्यापार पर कमीशन वसूलने का आरोप है.
झारखंड भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो यानी एसीबी ने करीब दो महीने पहले दोनों को पूछताछ के लिए बुलाया था. लेकिन संतोषजनक जवाब नहीं देने पर दोनों को गिरफ्तार कर लिया था.
गिरफ्तारी के बाद उन्हें न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया था. तब से दोनों जेल में बंद थे.
उत्पाद एवं मद्ध निषेध विभाग के पूर्व प्रधान सचिव विनय कुमार चौबे से जुड़े शराब घोटाले के केस में दोनों गिरफ्तार हुए थे.
यह घोटाला FL-10 A/B लाइसेंस सिस्टम से हुआ. साथ ही पैसा ठिकाने लगाने के लिए रिश्तेदारों के बैंक खातों का इस्तेमाल किया गया.
जांच में पता चला है कि विदेशी शराब लाइसेंसी कंपनी ओम साई बेवरेजे के इन दोनों निदेशकों की घोटाले में भूमिका सामने आई थी.
इस कंपनी के मुख्य लाभार्थी विजय भाटिया को छत्तीसगढ़ इओडब्ल्यू ने गिरफ्तार किया था.
छत्तीसगढ़ की जांच एजेंसी ने शराब में कमीशन संबंधित तथ्यों पर आधारित अपनी छठवीं चार्जशीट मंगलवार को जांच एजेंसी विशेष न्यायालय में दाखिल की थी.
आबकारी अधिकारियों को अग्रिम जमानत
इधर शराब घोटाले मामले में आरोपी बनाए गए आबकारी विभाग के अधिकारियों को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है.
सुप्रीम कोर्ट ने शर्तों के साथ सभी 28 अफसरों को अग्रिम जमानत दे दी है. अब इस मामले की अगली सुनवाई अक्टूबर में होगी.
ईओडब्ल्यू की जांच के मुताबिक छत्तीसगढ़ में 32 सौ करोड़ रुपए का शराब घोटाला हुआ है. इस मामले में आबकारी विभाग से जुड़े 29 अफसरों को ईओडब्ल्यू ने आरोपी बनाया है.
इन अफसरों पर आरोप है कि शराब ठेके और लाइसेंस देने में बड़े पैमाने पर अवैध वसूली की है. उसके खिलाफ चालान पेश किया था.
इन सभी अफसरों को 20 अगस्त को कोर्ट में पेश होना था, लेकिन सभी ने हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका लगाई थी.
हाईकोर्ट से 18 अगस्त को अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी. इसके बाद सभी अफसरों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था.
आज सुप्रीम कोर्ट ने सभी 28 अफसरों को शर्तों के साथ अग्रिम जमानत दे दी है.