मुझे भाजपा में शामिल कराना चाहते थे मोदी और शाह-भूपेश बघेल
भाजपा मेरे विधायक तोड़ना चाहती थी-भूपेश बघेल
रायपुर | संवाददाता: छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा है कि भाजपा उनकी सरकार तोड़ना चाहती थी. इसके लिए विधायकों को ख़रीदना चाहती थी. भाजपा उसमें सफल नहीं हो पाई. इसके बाद जब मुझे झारखंड का वरिष्ठ पर्यवेक्षक बनाया गया. अमित शाह की उम्मीद के विपरित भाजपा की वहां सरकार नहीं बन पाई और कांग्रेस गठबंधन की सरकार बन गई तो अमित शाह को बर्दाश्त नहीं हुआ. हेमंत सोरेन के शपथग्रहण के आठवें दिन छत्तीसगढ़ में आईटी का छापा पड़ा.
भूपेश बघेल देश के जाने-माने वकील और सांसद कपिल सिब्बल के पॉडकास्ट में अपनी बात रख रहे थे. उनके साथ उनके बेटे चैतन्य बघेल ने भी आपना पक्ष रखा.
छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि 2020 से अब तक छत्तीसगढ़ में लगभग 700 छापे मारे गए हैं. उन्होंने कहा कि जब वे झारखंड चुनाव में पार्टी का पर्यवेक्षक बनाया गया, उसके बाद छापा मारा गया. फिर उत्तरप्रदेश में चुनाव हुआ तो हर आठवें दिन छापा पड़ता था. फिर हिमाचल प्रदेश आया तो छापे पड़ते रहे. फिर असम गया तो फिर छापे पड़ते रहे. फिर जब छत्तीसगढ़ में चुनाव आया तो फिर लगातार छापे पड़े, उनकी गिनती नहीं है. सरकार जाने के बाद पंजाब का प्रभारी बना तो फिर मेरे घर छापा पड़ा.
रायपुर में कांग्रेस पार्टी के अधिवेशन के दौरान छापामारी की कार्रवाई को लेकर कपिल सिब्बल ने भूपेश बघेल से पूछा-उनकी शायद सोच रही हो कि आप पर दबाव डालें तो शायद आप बीजेपी को ज्वाइन कर लें?
भूपेश बघेल ने कहा-"उनका उनकी मंशा वही रही होगी क्योंकि एक दो बार अमित शाह जी भी बुलाए थे मुझे.मोदी जी भी बुलाए थे। लेकिन मैं समझा नहीं कि वो लोग किस लिए बुलाए हैं. लेकिन इशारा उनका मुझे बाद में समझ आया कि जब मैं मिलके आता था उसके बाद और छापा पड़ता था."
उन्होंने पीएम नरेंद्र मोदी और अमित शाह को लेकर कहा-"फिर पूछते थे कि आपको कैसे मदद करें? उनका लाइन ये होता था कि आपके खिलाफ कौन-कौन सा केस चल रहा है? कौन-कौन से आपके अधिकारी जो आपकी विश्वस्त हैं. तो मैं उनको बोला भी कि मुझे बहुत सुखद आश्चर्य हो रहा था साहब कि मैं विपक्ष का हूं और मेरा विपक्षी धर्म ही यह कहता है कि मैं आपकी आलोचना करूं और मैं करता भी हूं। लेकिन उसके बाद भी आप मुझे बुला के सहयोग करने की बात कर रहे हैं। तो ये मेरे लिए सुखद आश्चर्य है मैं तो सोच नहीं सकता था कि आप ऐसा सहयोग करना चाहते थे। ऐसा बोल के जाता था और आठवें दिन फिर से छापा पड़ जाता था."
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि उन्होंने एक बार तो प्रधानमंत्री जी फोन करके बोला कि साहब, आप तो मदद करूंगा बोले थे. यहां रेड डलवा दिए. तो प्रधानमंत्री का जवाब होता था कि अरे, मैं अधिकारियों को बोलता हूं, बात करता हूं.
भूपेश बघेल ने कहा-"मुझे समझ नहीं आता था कि भाजपा में बुलाने के लिए ये बुला रहे हैं...हालांकि वैसे बोलते नहीं थे. लेकिन बाद में समझ आया कि मैं उनको कुछ बोल के नहीं आया. कमिटमेंट करके नहीं आया और इस कारण से फिर हर चौंथे दिन-पांचवें दिन छापा पड़ जाता था. जितने बार भी गया.."