शनि, 17 अक्टू. 2026

CGKhabar

बंगाल: ईद से पहले मवेशी बाजारों में पसरा सन्नाटा

C

CG Khabar

25 मई 2026, 06:57 PM 3 मिनट में पढ़ें 1

गाय-भैंस
गाय-भैंस

कोलकाता । डेस्क: पश्चिम बंगाल में ईद-उल-अजहा (बकरीद) के त्योहार से ठीक पहले राज्य के मवेशी बाजारों में इस बार वह चहल-पहल नहीं दिख रही है, जो आमतौर पर हर साल नजर आती थी. कोलकाता के बाहरी इलाके में स्थित धुलागढ़ मवेशी बाजार, जो कभी इस सीजन में व्यापार का एक बड़ा केंद्र हुआ करता था, इस बार लगभग खाली पड़ा है.


बाजारों में सैकड़ों मवेशी खुले में बंधे हैं, लेकिन खरीदारों की कमी के कारण हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों के व्यापारी परेशान हैं. कई विक्रेताओं ने त्योहार के सीजन को देखते हुए भारी कर्ज लेकर स्टॉक जमा किया था, लेकिन ग्राहकों के न आने से उन्हें बड़े नुकसान का डर सता रहा है.


नए नियमों का क्रियान्वयन और 1950 का कानून


पश्चिम बंगाल में हालिया राजनीतिक बदलावों के बाद, प्रशासन ने राज्य में 1950 के मवेशी वध निषेध कानून को कड़ाई से लागू करने के निर्देश दिए हैं. इस कानून के तहत किसी भी मवेशी के वध के लिए सरकारी अधिकारी से "वध के लिए उपयुक्त" होने का वैध प्रमाण पत्र (फिटनेस सर्टिफिकेट) लेना अनिवार्य है. 


इसके साथ ही, नियम यह भी स्पष्ट करता है कि केवल 14 वर्ष से अधिक आयु के पशुओं का ही निर्धारित नगर निगम या प्रशासनिक बूचड़खानों में वध किया जा सकता है. इन प्रशासनिक नियमों के कड़े पालन के कारण बाजार में आपूर्ति और मांग दोनों प्रभावित हुई हैं.


छोटे व्यापारियों और किसानों पर आर्थिक असर


धुलागढ़ बाजार में आए कई हिंदू विक्रेता, जो मुख्य रूप से राज्य के विभिन्न जिलों जैसे पूर्वी मेदिनीपुर से आए हैं, भारी वित्तीय दबाव में हैं. वे साल के बाकी महीनों में निर्माण मजदूर के रूप में काम करते हैं और इस त्योहार पर अच्छी कमाई की उम्मीद में निवेश करते हैं. 


व्यापारियों का कहना है कि बिक्री न होने के कारण प्रति अनुत्पादित पशु पर उन्हें हजारों रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है. कई व्यापारियों ने पशुओं को खरीदने के लिए अपनी पारिवारिक संपत्ति और आभूषणों को गिरवी रखकर कर्ज लिया था, जिसकी भरपाई करना अब उनके लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है.


कोलकाता के खान-पान उद्योग पर प्रभाव


मवेशी व्यापार में आई इस सुस्ती का सीधा असर कोलकाता के प्रसिद्ध फूड हब और रेस्तरां उद्योग पर भी देखने को मिल रहा है. महानगर के न्यू मार्केट इलाके के मीट विक्रेताओं के अनुसार, पिछले कुछ हफ्तों में मांग में भारी गिरावट आई है. 


आपूर्ति शृंखला प्रभावित होने के कारण कई लोकप्रिय रेस्तरां और छोटे खाद्य काउंटरों ने अपने मेनू से कुछ विशेष मीट व्यंजनों को अस्थायी रूप से हटा दिया है. छोटे होटलों और सड़क किनारे खान-पान की दुकानें लगाने वाले दुकानदारों ने भी कच्चे माल की खरीद कम कर दी है, जिससे थोक और खुदरा दोनों बाजारों में व्यापार का समय सिमट गया है.


विशेषज्ञों का दृष्टिकोण


पशु कल्याण और कानून के जानकारों का मानना है कि मवेशी वध से जुड़े नियम ग्रामीण अर्थव्यवस्था और आजीविका से सीधे जुड़े होते हैं. देश के विभिन्न राज्यों में इन नियमों के कार्यान्वयन का तरीका वहां की स्थानीय व्यापारिक परिस्थितियों को प्रभावित करता है. 


पश्चिम बंगाल जैसे विविध सांस्कृतिक और खान-पान वाले राज्य में, इन नियमों के कड़ाई से लागू होने से त्योहारों के दौरान बाजार की पूरी व्यवस्था और इससे जुड़े लाखों लोगों के रोजगार पर तात्कालिक प्रभाव पड़ना स्वाभाविक है.

यह खबर शेयर करें: WhatsApp Facebook
CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP