शनि, 17 अक्टू. 2026

CGKhabar

बीबीसी ने ट्रंप से माफी मांगी, लेकिन मुकदमे की धमकी ठुकराई

C

CG Khabar

14 नव. 2025, 12:55 AM 3 मिनट में पढ़ें 1

BBC
BBC

लंदन । डेस्क: ब्रिटेन की ब्रॉडकास्टर बीबीसी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से माफी मांग ली है. मामला 2021 की एक स्पीच को गलत तरीके से एडिट करने का है, जिसमें ट्रंप को हिंसा भड़काने वाला दिखाया गया था. लेकिन बीबीसी ने ट्रंप की मानहानि का मुकदमा करने की धमकी को सिरे से खारिज कर दिया है.


बीबीसी के चेयरमैन समीर शाह ने व्हाइट हाउस को एक निजी पत्र लिखकर कहा कि वे ट्रंप और पूरी कंपनी की ओर से स्पीच को एडिट करने के तरीके पर खेद जताते हैं. उन्होंने साफ किया कि यह गलती हुई, लेकिन इससे ट्रंप की इज्जत को कोई नुकसान नहीं पहुंचा.

विज्ञापन


बीबीसी ने फैसला लिया है कि वह डॉक्यूमेंट्री 'ट्रंप: ए सेकंड चांस?' को कभी दोबारा अपने किसी भी प्लेटफॉर्म पर नहीं दिखाएगा. यह फिल्म एक थर्ड-पार्टी प्रोडक्शन कंपनी ने बनाई थी, जो पैनोरामा शो के लिए थी.


क्या हुआ था?

6 जनवरी 2021 को ट्रंप ने वाशिंगटन में एक स्पीच दी थी, जिसमें उन्होंने समर्थकों से कहा था कि वे शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन करें. लेकिन बीबीसी की फिल्म में स्पीच के दो हिस्सों को एक-दूसरे से जोड़ दिया गया. एक हिस्सा जहां ट्रंप ने कहा 'फाइट लाइक हेल', उसे पहले हिस्से से चिपका दिया, जिसमें उन्होंने समर्थकों को कैपिटल की ओर मार्च करने को कहा था. दोनों हिस्से लगभग एक घंटे के फासले पर थे. नतीजा? ऐसा लगा जैसे ट्रंप ने हिंसा का आह्वान किया हो. उसी दिन ट्रंप के हजारों समर्थक कैपिटल भवन पर हमला करने पहुंचे, जहां 2020 चुनाव के नतीजों की पुष्टि हो रही थी. ट्रंप चुनाव हार चुके थे.


यह डॉक्यूमेंट्री 2024 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव से ठीक पहले दिखाई गई थी, जिसे ट्रंप ने जीत लिया. ट्रंप के वकीलों ने बीबीसी को चिट्ठी लिखी कि फिल्म हटा लो, माफी मांगो और कम से कम 10 अरब डॉलर (करीब 84 हजार करोड़ रुपये) का हर्जाना दो, वरना मुकदमा करेंगे. उन्होंने फिल्म को झूठा, बदनाम करने वाला और भड़काऊ बताया.


बीबीसी ने कहा, "हमें एडिटिंग पर सच्चा अफसोस है, लेकिन मानहानि का कोई आधार नहीं है." कंपनी ने साफ किया कि ट्रंप को कोई नुकसान नहीं हुआ, क्योंकि वे राष्ट्रपति बन ही गए.


इधर, बीबीसी पर 'सिस्टमिक बायस' के आरोप लगे हैं. द टेलीग्राफ अखबार ने लीक दस्तावेज छापे, जिसमें बीबीसी पर ट्रंप के खिलाफ झुकाव का इल्जाम था. इसी विवाद में बीबीसी के डायरेक्टर-जनरल टिम डेवी और न्यूज चीफ डेबोरा टर्नेस ने रविवार को इस्तीफा दे दिया. टर्नेस ने कहा, "न्यूज और करंट अफेयर्स की सीईओ के तौर पर जिम्मेदारी मेरी है." डेवी ने कहा, "बीबीसी दुनिया में पत्रकारिता का गोल्ड स्टैंडर्ड है, लेकिन कुछ गलतियां हुईं, जिनकी जिम्मेदारी मैं लेता हूं."


कानूनी जानकारों का कहना है कि ट्रंप का मुकदमा ब्रिटेन या अमेरिका में चलाना मुश्किल होगा. ब्रिटेन में मानहानि के केस की समय सीमा एक साल पहले ही खत्म हो चुकी है, और वहां हर्जाना 1 लाख पाउंड (करीब 1 करोड़ रुपये) से ज्यादा नहीं मिलता. अमेरिका में फिल्म दिखाई ही नहीं गई, तो वहां के लोग प्रभावित कैसे हुए? फिर भी, ट्रंप ने पहले एबीसी और सीबीएस जैसी कंपनियों से करोड़ों का सेटलमेंट लिया है. एबीसी ने 15 मिलियन डॉलर (करीब 125 करोड़ रुपये) दिए, जबकि सीबीएस की पैरामाउंट ने 16 मिलियन डॉलर (करीब 134 करोड़ रुपये).


बीबीसी को अपनी गलती के लिए दर्शकों के लाइसेंस फीस से पैसे चुकाने पड़ सकते हैं. इससे कंपनी के आलोचक और मजबूत हो जाएंगे, खासकर जब कई लोग फीस न चुकाने लगे हैं. यह मामला बीबीसी की निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर रहा है.

यह खबर शेयर करें: WhatsApp Facebook
CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP