बस्तर दशहरा: 'मुरिया दरबार' का नाम बदलने की कोशिशों पर गरमाई राजनीति
बस्तर दशहरा के ऐतिहासिक 'मुरिया दरबार' का नाम बदलकर 'आम दरबार' लिखे जाने पर राजनीतिक घमासान शुरू हो गया है. बीजापुर विधायक विक्रम मंडावी ने इसे आदिवासी पहचान मिटाने की साज़िश बताते हुए आंदोलन की चेतावनी दी है.
बीजापुर । संवाददाता: बस्तर की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत के प्रतीक 'मुरिया दरबार' के नाम को लेकर छत्तीसगढ़ की राजनीति में भूचाल आ गया है. इस साल बस्तर दशहरा के आधिकारिक शेड्यूल में करीब 150 साल पुरानी परंपरा 'मुरिया दरबार' को 'आम दरबार' के रूप में दर्शाए जाने पर बीजापुर से कांग्रेस विधायक विक्रम मंडावी ने कड़ा विरोध जताया है.
राज्य की सत्तासीन भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि यह बस्तर के आदिवासियों की ऐतिहासिक पहचान, आस्था और परंपराओं को धीरे-धीरे समाप्त करने की एक सोची-समझी कोशिश है.
विधायक मंडावी का कहना है कि सिरहासार में दशहरा पर्व के समापन अवसर पर आयोजित होने वाला यह दरबार केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि आदिवासी समुदाय के लिए अपनी बात रखने का दशकों पुराना एक लोकतांत्रिक और पारंपरिक मंच है.
इस ऐतिहासिक आयोजन में मांझी-चालकी सहित आदिवासी समाज के प्रतिनिधि अपनी समस्याओं और स्थानीय मुद्दों को सरकार के सामने रखते आए हैं. ऐसे में इसके नाम में बदलाव करना बस्तर की आत्मा और सांस्कृतिक जड़ों पर सीधा प्रहार है.
इतना ही नहीं, जगदलपुर स्थित 'माड़िया चौक' का नाम बदले जाने की हालिया चर्चाओं का जिक्र करते हुए मंडावी ने कहा कि पहले चौक और अब 'मुरिया दरबार' की पहचान को बदलने का प्रयास यह साबित करता है कि मौजूदा सरकार की नीतियां बस्तर के जल, जंगल, जमीन के साथ-साथ वहां की समृद्ध आदिवासी संस्कृति को नुकसान पहुंचा रही हैं.
हालांकि, माड़िया चौक के मामले में स्थानीय बस्तर जिला प्रशासन ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि नाम में ऐसा कोई बदलाव नहीं किया जा रहा है, लेकिन मुरिया दरबार के मुद्दे पर प्रशासन का आधिकारिक रुख आना अभी बाकी है.
कांग्रेस विधायक ने प्रशासन से मांग की है कि नाम बदलने से जुड़े फैसले को तुरंत निरस्त किया जाए और सभी आधिकारिक दस्तावेजों, आमंत्रण कार्डों व सरकारी कार्यक्रम सूचियों में 'मुरिया दरबार' नाम ही पूर्ववत दर्ज रखा जाए.
उन्होंने दो टूक चेतावनी दी कि यदि सरकार और प्रशासन ने इस मांग को गंभीरता से नहीं लिया और आदिवासियों की सांस्कृतिक अस्मिता से खिलवाड़ बंद नहीं किया, तो इस मुद्दे को लेकर सड़क पर उतरकर उग्र आंदोलन किया जाएगा.