छत्तीसगढ़ से ओडिशा तक हाथियों का आतंक: धान की फसलें तबाह, रेलगााड़ियां थमीं
छत्तीसगढ़ के धरमजयगढ़, कोरबा और जशपुर सहित ओडिशा के राउरकेला में हाथियों के अलग-अलग दलों ने भारी तबाही मचाई है. फसलों को नुकसान के साथ-साथ जनहानि और रेल यातायात प्रभावित होने से ग्रामीणों में दहशत का माहौल है.
रायगढ़ । संवाददाता: हाथियों और इंसानों के बीच बढ़ता संघर्ष अब गंभीर रूप लेता जा रहा है. हावड़ा-मुंबई मुख्य रेलमार्ग के बंडामुंडा रेलखंड पर रविवार देर रात उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब 24 हाथियों का एक बड़ा झुंड पटरियों पर आ धमका. इसके चलते मध्य रात्रि करीब दो बजे रेल परिचालन पूरी तरह रुक गया और धनबाद-एर्नाकुलम अलप्पुझा एक्सप्रेस, सूरत-मालदा एक्सप्रेस, धनबाद स्पेशल तथा शालीमार सुपरफास्ट एक्सप्रेस जैसी प्रमुख ट्रेनें घंटों खड़ी रहीं, जिससे यात्रियों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ा.
दूसरी ओर, जशपुर जिले में रायगढ़ की सीमा से दाखिल हुए 32 हाथियों के दल ने बारीकजोर के जंगलों में डेरा डाल रखा है. विजयादशमी के बाद धान की कटाई की तैयारी कर रहे आसपास के आठ गांवों के किसान अपनी पकी फसलों की सुरक्षा को लेकर बेहद चिंतित हैं. हालांकि, प्रशासन और वन अमला ग्रामीणों को समझाकर जंगल में जाने से रोक रहा है ताकि किसी भी तरह की जनहानि से बचा जा सके.
इसी बीच, धरमजयगढ़ और कोरबा क्षेत्र में भी हाथियों के अलग-अलग दलों का कहर जारी है. अकेले धरमजयगढ़ इलाके में 148 हाथी विचरण कर रहे हैं, जिनमें नर, मादा और शावक शामिल हैं. शाम ढलते ही ये दल भोजन की खोज में रिहायशी इलाकों और खेतों की रुख कर रहे हैं.
कोरबा के करतला और कटघोरा मंडल के पसान क्षेत्र में मौजूद हाथियों ने दर्जनों किसानों की फसल रौंद डाली है. कटघोरा के खोडरी इलाके में हाथियों को खदेड़ने का प्रयास कर रहे प्रताप सिंह नाम के व्यक्ति की गिरकर घायल होने के बाद इलाज के दौरान मौत हो गई, जिसके बाद से पूरे इलाके में दहशत व्याप्त है.
फिलहाल, प्रभावित सभी वन मंडलों में निगरानी टीमें मुस्तैद कर दी गई हैं. वन विभाग हाथियों की हर गतिविधि पर नजर रखने के साथ ही पीड़ित किसानों को मुआवजा दिलाने के लिए नुकसान का आकलन और प्रकरण तैयार करने की कार्रवाई में जुटा हुआ है.