भिलाई इस्पात संयंत्र के निजीकरण की खबरें अफवाह, प्रबंधन का स्पष्टीकरण
भिलाई स्टील प्लांट (BSP) के निजीकरण और अडानी समूह के दौरे की खबरों को लेकर प्रबंधन ने आधिकारिक बयान जारी कर इन्हें पूरी तरह भ्रामक बताया है. इस मुद्दे पर छत्तीसगढ़ की राजनीति गर्मा गई है.
दुर्ग । संवाददाता: छत्तीसगढ़ के गौरव भिलाई इस्पात संयंत्र (BSP) के निजीकरण और इसे किसी निजी औद्योगिक समूह को सौंपे जाने की चर्चाओं पर अब विराम लग गया है. रविवार को बीएसपी प्रबंधन ने एक आधिकारिक बयान जारी करते हुए साफ किया कि संयंत्र को बेचे जाने से जुड़ी सभी खबरें पूरी तरह भ्रामक और बेबुनियाद हैं. प्रबंधन के इस स्पष्टीकरण के बाद संयंत्र के भविष्य को लेकर उठ रही तमाम अटकलों पर फिलहाल लगाम लग गई है.
बीएसपी के निजीकरण को लेकर प्रदेश का राजनीतिक पारा अचानक चढ़ गया था. विवाद की शुरुआत पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के उस सोशल मीडिया पोस्ट से हुई, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि अडानी समूह के प्रतिनिधि भिलाई स्टील प्लांट का मुआयना करने आ रहे हैं.
उन्होंने बीएसपी को 'छत्तीसगढ़ की आत्मा' बताते हुए केंद्र सरकार की मंशा पर सवाल खड़े किए थे. इसके तुरंत बाद भिलाई नगर के विधायक देवेंद्र यादव ने भी कड़ा रुख अपनाते हुए कहा था कि संयंत्र केवल एक कारखाना नहीं बल्कि जन-भावनाओं से जुड़ा प्रतीक है, और वे इसे किसी भी कीमत पर बिकने नहीं देंगे.
कांग्रेस नेताओं के इन दावों पर पलटवार करते हुए वैशाली नगर से भाजपा विधायक रिकेश सेन ने तीखी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कांग्रेस नेताओं पर जनता के बीच भ्रम और अफवाह फैलाने का आरोप लगाया.
रिकेश सेन ने चुनौती दी कि यदि नेताओं के पास निजीकरण या बिक्री से जुड़े कोई ठोस दस्तावेज हैं, तो उन्हें सार्वजनिक किया जाए. साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ऐसी खबरें झूठी साबित हुईं तो वे कांग्रेस नेताओं के आवास के बाहर धरना देंगे.
हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अगर वास्तव में संयंत्र को बेचने का कोई प्रयास होता है, तो वे स्वयं सबसे पहले इसके विरोध में खड़े होंगे. राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के इस माहौल के बीच अब बीएसपी प्रबंधन के बयान ने स्थिति को स्पष्ट कर दिया है.