बांग्लादेश: चुनाव आयोग और चुनाव अवैध- अवामी लीग
ढाका । डेस्क: बांग्लादेश की अंतरिम सरकार और उनके द्वारा नियुक्त निर्वाचन आयोग को देश की प्रमुख राजनीतिक पार्टी बांग्लादेश अवामी लीग ने 'अवैध' करार दिया है. मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) एएमएम नसीरुद्दीन ने घोषणा की कि आगामी 12 फरवरी को राष्ट्रीय संसद के चुनाव और जुलाई चार्टर पर एक साथ जनमत संग्रह होगा.
हालांकि, बयान में यह भी कहा गया था कि 'प्रतिबंधित' अवामी लीग इसमें भाग नहीं ले पाएगी. इसके तुरंत बाद, सत्ता से बेदखल प्रधानमंत्री शेख हसीना की पार्टी ने एक लिखित बयान जारी कर चुनावी कार्यक्रम को 'खारिज' करने की घोषणा कर दी.
मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली सरकार के शासनकाल में 'प्रतिबंधित' की गई पार्टी ने अपने लिखित बयान में कहा, "बांग्लादेश अवामी लीग ने अवैध कब्ज़ाधारी खूनी-फासीवादी यूनुस गिरोह के अवैध चुनाव आयोग द्वारा घोषित कार्यक्रम को गहराई से देखा है. यह स्पष्ट रूप से साबित करता है कि वर्तमान कब्ज़ाधारी बल सौ प्रतिशत पक्षपातपूर्ण है, और उनके अधीन एक निष्पक्ष-सामान्य वातावरण में पारदर्शिता और तटस्थता बनाए रखते हुए जनता की राय को प्रतिबिंबित करना असंभव है."
हसीना की पार्टी का दावा है कि चुनाव ही लोकप्रियता मापने का पैमाना है और अवामी लीग एक चुनाव-उन्मुख दल है, जो जनता के सामने खड़े होने का साहस रखती है. पार्टी ने कहा कि अपने गठन के बाद से उसने 13 चुनावों में भाग लिया है और उनमें से नौ में जीत हासिल करके सरकार बनाई है.
अवामी लीग ने आरोप लगाया है कि मौजूदा परिस्थितियों में चुनाव एक 'प्रहसन' बनने जा रहा है. उनका कहना है कि मुक्ति संग्राम का नेतृत्व करने वाली अवामी लीग सहित अन्य समान विचारधारा वाले राजनीतिक दलों यानी आबादी के एक बड़े हिस्से को बाहर रखकर चुनाव आयोजित करना असल में पूरे देश और राष्ट्र को एक गहरे संकट की ओर ले जाने की साजिश है.
पार्टी ने अपनी मांगों में कहा है कि बांग्लादेश अवामी लीग पर लगाए गए सभी प्रतिबंधों को तुरंत वापस लिया जाए. बंगबंधु की बेटी, जननेत्री शेख हसीना सहित राष्ट्रीय नेताओं और सभी वर्गों के लोगों के खिलाफ दायर झूठे मुकदमों को तुरंत वापस लिया जाए. सभी राजनीतिक बंदियों की बिना शर्त रिहाई हो. वर्तमान रंग बदलने वाली कब्ज़ाधारी सरकार को हटाकर एक तटस्थ अंतरिम सरकार के तहत निष्पक्ष और भागीदारीपूर्ण चुनाव आयोजित किए जाएं.