बांग्लादेश में निपाह वायरस से एक महिला की मौत
राजशाही । डेस्क: बांग्लादेश में निपाह वायरस के संक्रमण से एक महिला की मौत हो गई है, जिसके बाद विश्व स्वास्थ्य संगठन ने अलर्ट जारी किया है. 40 से 50 वर्ष की आयु के बीच की यह महिला नौगांव जिले की निवासी थी और उसमें बुखार के साथ तंत्रिका संबंधी लक्षण (neurological symptoms) देखे गए थे.
रिपोर्ट के अनुसार, 28 जनवरी को अस्पताल में भर्ती होने के बाद जांच में संक्रमण की पुष्टि हुई और इलाज के दौरान उसकी जान चली गई. महिला ने हाल ही में कच्चे खजूर का रस पिया था, जिसे संक्रमण का मुख्य कारण माना जा रहा है.
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 3 फरवरी 2026 को बांग्लादेश से इस मामले की आधिकारिक अधिसूचना मिलने की पुष्टि की है. हालांकि, WHO ने स्पष्ट किया है कि वैश्विक और क्षेत्रीय स्तर पर इस बीमारी के फैलने का जोखिम फिलहाल कम है और संगठन ने अभी किसी भी तरह के यात्रा या व्यापार प्रतिबंध की सिफारिश नहीं की है.
गौरतलब है कि पिछले सप्ताह भारत के पश्चिम बंगाल में भी निपाह के दो मामले सामने आए थे, जिसके बाद पड़ोसी देशों में स्वास्थ्य जांच तेज कर दी गई है.
बांग्लादेश में साल 2001 से अब तक लगभग 348 मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें से अधिकतर का संबंध कच्चे खजूर के रस के सेवन से रहा है. निपाह वायरस की मृत्यु दर 40 से 75 प्रतिशत तक हो सकती है और वर्तमान में इसके लिए कोई लाइसेंस प्राप्त टीका या दवा उपलब्ध नहीं है.
गौरतलब है कि निपाह वायरस (NiV) एक गंभीर ज़ूनोटिक वायरस है, जिसका अर्थ है कि यह जानवरों से इंसानों में फैलता है और दूषित भोजन या संक्रमित व्यक्ति के सीधे संपर्क के माध्यम से भी प्रसारित हो सकता है. इस वायरस का प्राकृतिक भंडार 'फ्रूट बैट्स' (पॉटेरोपस प्रजाति के चमगादड़) हैं, जो मुख्य रूप से खजूर के पेड़ों और फलों के आसपास पाए जाते हैं.
इंसानों में इसके लक्षण बहुत ही सामान्य बुखार और सिरदर्द से शुरू होते हैं, लेकिन तेजी से श्वसन संबंधी गंभीर समस्याओं और मस्तिष्क में सूजन (एन्सेफलाइटिस) तक पहुँच सकते हैं, जिससे मरीज़ कोमा में जा सकता है. इस वायरस की सबसे चिंताजनक बात इसकी उच्च मृत्यु दर है, जो 40% से 75% के बीच हो सकती है.
वर्तमान में निपाह वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए कोई विशेष टीका या सटीक इलाज उपलब्ध नहीं है, इसलिए सहायक देखभाल और लक्षणों का उपचार ही मुख्य तरीका है. इससे बचने के लिए सबसे प्रभावी उपाय यह है कि गिरे हुए फलों को न खाया जाए, कच्चे खजूर के रस के सेवन से बचा जाए और संक्रमित व्यक्तियों की देखभाल करते समय सुरक्षात्मक उपकरणों का उपयोग किया जाए.
चूंकि यह वायरस बार-बार अपना स्वरूप बदल सकता है और इसके प्रकोप की संभावना बनी रहती है, इसलिए WHO ने इसे 'ब्लूप्रिंट प्राथमिकता वाली बीमारियों' की सूची में रखा है ताकि इस पर अनुसंधान तेज किया जा सके.