प्राचार्यों के प्रमोशन पर रोक हटी, सभी याचिकाएं खारिज
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने प्राचार्य प्रमोशन पर लगी सभी याचिका को खारिज कर दिया
बिलासपुर | संवाददाताः छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने काफी दिनों से लंबित प्राचार्य प्रमोशन को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है. हाईकोर्ट ने राज्य शासन की प्रमोशन नीति को सही ठहराते हुए सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया है. इस फैसले के बाद प्राचार्यों की पदोन्नति का रास्ता साफ हो गया है.
जस्टिस रजनी दुबे और जस्टिस एके प्रसाद की डिवीजन बेंच ने यह फैसला सुनाया है. करीब 15 दिन पहले ही डिवीजन बेंच ने सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिस पर आज यानी मंगलवार को आदेश जारी किया गया है.
प्राचार्य प्रमोशन को लेकर हाईकोर्ट में अलग-अलग याचिकाएं दायर की गईं थी. एक मामला 2019 से जुड़ा हुआ है. जबकि दूसरा प्रकरण 2025 और बीएड-डीएलएड से जुड़ा है.
याचिकाकर्ताओं की ओर से कोर्ट में यह दलील दी गई थी कि बीएड को अनिवार्य मानते हुए कई वरिष्ठ शिक्षकों को दरकिनार किया गया है.
साथ ही यह भी बताया गया था कि कोर्ट के आदेश के बावजूद कई शिक्षकों को प्राचार्य पद पर प्रमोशन देकर पदस्थ करा दिया गया है. यह न्यायालय की अवमानना है.
28 मार्च 2025 को जब हाईकोर्ट की पिछली सुनवाई हुई थी, तो राज्य सरकार की ओर से कोर्ट को आश्वस्त किया गया था, कि अगली सुनवाई तक प्राचार्य प्रमोशन का आदेश जारी नहीं किया जाएगा.
लेकिन शिक्षा विभाग ने 30 अप्रैल को प्राचार्य प्रमोशन सूची जारी की थी, जिस पर हाईकोर्ट ने 1 मई को रोक लगा दी थी.
इस दौरान याचिकाकर्ताओं के साथ ही शिक्षक संघ और शासन ने पक्ष रखा.
राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि प्रमोशन प्रक्रिया में सभी वर्गों के शिक्षकों के हितों का ध्यान रखा गया है.
साल 2019 और 2025 की याचिकाओं में बीएड, डीएलएड और वरिष्ठता जैसे मुद्दे शामिल थे.
सरकार ने नियमों के अनुसार कार्रवाई की है. इसमें कोई गड़बड़ी नहीं की गई है.
इस मामले में हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच में 11 जून से 16 जून तक लगातार सुनवाई हुई.
इस दौरान याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ताओं ने अपनी बहस पूरी करते हुए बीएड डिग्री को प्राचार्य पद के लिए अनिवार्य बताया.
इसके अलावा उन्होंने माध्यमिक स्कूलों के प्रधान पाठकों से लेक्चरर बने शिक्षकों की वरिष्ठता का मुद्दा भी उठाया.
मामले की सुनवाई के बाद डिवीजन बेंच ने निर्णय सुरक्षित रख लिया था. जिस पर आज फैसला सुनाया गया.
अदालत ने राज्य शासन की प्रमोशन नीति को सही ठहराते हुए कहा कि इसमें हस्तक्षेप की जरूरत नहीं है.
अदालत ने नियमों में मामूली संशोधन का सुझाव दिया, लेकिन प्रमोशन आदेशों को वैध बताते हुए, इस मामले में दायर याचिकाओं को खारिज कर दिया.
इधर शिक्षक साझा मंच के प्रदेश संचालक संजय शर्मा ने कहा कि अब हाईकोर्ट का फैसला आ गया है. जिसमें स्थगन आदेश को हटाकर सभी याचिकाएं खारिज की गई हैं. ऐसे में अब जारी प्रमोशन सूची के आधार पर राज्य सरकार तत्काल प्राचार्यों की पोस्टिंग आदेश जारी करे.
उन्होंने मांग की है कि तत्काल ही प्रदेश के स्कूलों में प्राचार्यों की नियुक्ति की जाए.