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गर्भवती पत्नी को आत्महत्या के लिए उकसाने वाले पति की जमानत याचिका खारिज

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11 अग. 2026, 12:43 AM 2 मिनट में पढ़ें 1

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट

बिलासपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने अपनी 18 से 20 सप्ताह की गर्भवती पत्नी को दहेज के लिए शारीरिक व मानसिक रूप से प्रताड़ित करने और उसे आत्महत्या के लिए विवश करने के आरोपी 30 वर्षीय पति की नियमित जमानत याचिका को खारिज कर दिया है. 31 जुलाई को मामले की सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा की पीठ ने बेहद कड़ा रुख अपनाया. अदालत ने स्पष्ट रूप से टिप्पणी की कि लगातार वैवाहिक क्रूरता के कारण एक गर्भवती महिला की मृत्यु होना एक अत्यंत गंभीर अपराध है. 


इसके साथ ही गवाहों के बयानों की विश्वसनीयता और एफआईआर दर्ज करने में हुई देरी जैसे पहलुओं को अदालत ने ट्रायल के दौरान जांच का विषय माना.

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यह मामला महासमुंद जिले के बसना थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम मानकी का है. अभियोजन पक्ष के अनुसार, दोनों का विवाह वर्ष 2022 में हुआ था और उनकी एक छोटी बेटी भी है. शादी के बाद से ही पति और उसके परिजन मोटरसाइकिल की मांग को लेकर महिला को लगातार प्रताड़ित कर रहे थे. 


2 दिसंबर 2025 को आरोपी पति ने महिला के साथ मारपीट की और उसे हमेशा के लिए मायके छोड़ने की धमकी दी. इससे क्षुब्ध होकर महिला ने 3 दिसंबर 2025 को फांसी लगाकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली.


घटना के बाद पुलिस द्वारा की गई शुरुआती जांच के आधार पर बसना पुलिस ने 31 मार्च 2026 को एफआईआर दर्ज की. पुलिस ने मृतका के परिजनों और स्वतंत्र गवाहों के बयान दर्ज किए, जिन्होंने लगातार प्रताड़ना और पूर्व में हुए समझौते के प्रयासों की पुष्टि की. 


इसके पश्चात 1 अप्रैल 2026 को पुलिस ने आरोपी पति को गिरफ्तार कर भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 80(2) के तहत मामला दर्ज किया.


सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकील ने तर्क दिया कि एफआईआर दर्ज करने में चार महीने का विलंब हुआ है और शुरुआती बयानों में दहेज का उल्लेख नहीं था. साथ ही यह भी कहा गया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बाहरी चोट के निशान नहीं मिले हैं और चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है, इसलिए आरोपी को जमानत दी जानी चाहिए. 


वहीं राज्य सरकार के वकील ने याचिका का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि मृतका घटना के समय 18 से 20 सप्ताह के गर्भ से थी और स्वतंत्र गवाहों ने भी निरंतर दहेज की मांग और उत्पीड़न का समर्थन किया है. उच्च न्यायालय ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए आरोपी को राहत देने से इनकार कर दिया.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP