ऑस्ट्रेलियाई SC ने कोयला खदान विस्तार पर लगाई रोक, जलवायु बचाने के लिये
नई दिल्ली । डेस्क: ऑस्ट्रेलिया की सर्वोच्च अदालत (हाई कोर्ट) ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए देश की एक प्रमुख कोयला खदान के विस्तार पर रोक लगा दी है. अदालत ने स्पष्ट किया कि योजना प्राधिकरण ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को "अधिकतम संभव सीमा तक कम करने" में विफल रहे हैं.
पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने इस फैसले को देश की शीर्ष अदालत का पहला बड़ा जलवायु मामला बताया है, जो अब भविष्य की सभी जीवाश्म ईंधन (फॉसिल फ्यूल) परियोजनाओं के लिए एक बाध्यकारी राष्ट्रीय मिसाल कायम करेगा.
हाई कोर्ट की पांच सदस्यीय बेंच में से तीन जजों ने न्यू साउथ वेल्स स्थित 'माउंट प्लेजेंट' कोयला खदान के विस्तार को रोकने का आदेश दिया. अदालत के अनुसार, योजना अधिकारियों का यह कर्तव्य था कि वे खदान विस्तार को मंजूरी देने से पहले सभी उत्सर्जित गैसों को न्यूनतम करने की शर्तें अनिवार्य रूप से लागू करें.
यह मामला सेवानिवृत्त विज्ञान शिक्षकों वेंडी वेल्स और टोनी लोनरगन द्वारा दायर किया गया था, जो सालों से इस विस्तार का विरोध कर रहे थे.
माउंट प्लेजेंट खदान का संचालन मैक एनर्जी करती है, जो इंडोनेशिया के सलीम ग्रुप की सहायक कंपनी है. कंपनी इस ओपन-कट खदान का कार्यकाल वर्ष 2048 तक बढ़ाकर इसका वार्षिक उत्पादन लगभग दोगुना करना चाहती थी.
कंपनी का तर्क था कि विदेश भेजे जाने वाले कोयले के जलने से होने वाले उत्सर्जन का सीधा संबंध स्थानीय पर्यावरण क्षति से नहीं जोड़ा जा सकता.
हालांकि, अदालत ने इस तर्क को खारिज करते हुए माना कि परियोजना से होने वाले उत्सर्जन और स्थानीय जलवायु क्षति के बीच सीधा संबंध है. यह फैसला ऑस्ट्रेलिया सहित दुनिया भर में जलवायु संबंधी मामलों के लिए एक नया दिशा-निर्देश तय करेगा.