ईरान युद्ध की आग में झुलसा एशिया का बाजार
नई दिल्ली । डेस्क: ईरान और इजरायल-अमेरिका के बीच छिड़े भीषण युद्ध ने एशिया की अर्थव्यवस्था और आम जनजीवन को गहरे संकट में डाल दिया है. सामरिक रूप से महत्वपूर्ण 'हॉर्मुज जलडमरूमध्य' से होने वाली तेल और गैस की आपूर्ति बाधित होने के कारण भारत, दक्षिण कोरिया और जापान जैसे देशों में हाहाकार मचा हुआ है.
इस युद्ध का सबसे सीधा प्रहार पेट्रोलियम उत्पादों और नेफ्था पर पड़ा है, जिससे प्लास्टिक निर्माण की लागत आसमान छूने लगी है.
भारत में जहां बोतलबंद पानी और शीतल पेय महंगे हो गए हैं, वहीं वैश्विक शराब कंपनियों ने गैस की किल्लत के चलते उत्पादन ठप होने की चेतावनी दी है.
विनिर्माण क्षेत्र में कच्चे माल की कमी का आलम यह है कि दक्षिण कोरिया की प्लास्टिक फैक्ट्रियां अपनी क्षमता से मात्र 20-30 प्रतिशत पर काम कर रही हैं और कच्चा माल न मिलने की स्थिति में बंद होने के कगार पर हैं.
बाजार में इस अनिश्चितता का असर रोजमर्रा की खाने-पीने की चीजों पर भी दिख रहा है.
दक्षिण कोरिया के मशहूर 'बुलडाक' रामेन नूडल्स और जापान के 'वासाबीफ' चिप्स की सप्लाई चेन पैकेजिंग सामग्री और बॉयलर ईंधन की कमी के कारण चरमरा गई है.
फिलीपींस ने ईंधन की भारी किल्लत और कीमतों में उतार-चढ़ाव को देखते हुए बिजली की हाजिर बिक्री पर रोक लगा दी है.
वहीं, चीन के खिलौना और टायर उद्योग भी नेफ्था और सिंथेटिक रबर की कमी से जूझ रहे हैं, जिससे वैश्विक स्तर पर वॉलमार्ट जैसे रिटेलर्स को होने वाली सप्लाई महंगी होने की उम्मीद है.
मुद्राओं के गिरते मूल्य और डॉलर की मजबूती ने एशियाई देशों की क्रय शक्ति को और कमजोर कर दिया है, जिसके चलते आम उपभोक्ताओं में अफरा-तफरी का माहौल है और लोग कूड़े की थैलियों से लेकर राशन तक का भंडारण करने लगे हैं.
जानकारों का मानना है कि यदि मई तक स्थिति नहीं सुधरी, तो एशिया में महंगाई और आपूर्ति का यह संकट एक बड़े मानवीय और आर्थिक संकट का रूप ले सकता हर