जग्गी हत्याकांड में अमित जोगी को उम्रकैद
छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित जग्गी हत्याकांड में जोगी कांग्रेस के सुप्रीमो और पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के बेटे अमित जोगी को हाईकोर्ट ने उम्रकैद की सज़ा सुनाई है.
रायपुर | संवाददाता: छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित जग्गी हत्याकांड में जोगी कांग्रेस के सुप्रीमो और पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के बेटे अमित जोगी को हाईकोर्ट ने उम्रकैद की सज़ा सुनाई है.
हाईकोर्ट ने कहा कि जब सभी आरोपियों पर एक ही अपराध में शामिल होने का आरोप हो, तो किसी एक आरोपी के साथ जानबूझकर अलग व्यवहार नहीं किया जा सकता.
चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस अरविन्द वर्मा की स्पेशल डिविजनल बेंच ने कहा कि जब सभी आरोपियों के खिलाफ एक जैसे सबूत हों, तो किसी एक को बरी कर देना और बाकी को उन्हीं सबूतों के आधार पर दोषी ठहराना सही नहीं है, जब तक कि उसे छोड़ने का कोई ठोस और अलग कारण साबित न हो.
गौरतलब है कि पहले ट्रायल कोर्ट ने अमित जोगी का बरी कर दिया था, लेकिन बाद में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर हाईकोर्ट में पिछले महीने सुनवाई हुई थी.
यह पूरा मामला साल 2003 का है, जब तत्कालीन राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के कोषाध्यक्ष रामावतार जग्गी की रायपुर में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. उस समय छत्तीसगढ़ में राजनीतिक माहौल बेहद गरमाया हुआ था और अजीत जोगी मुख्यमंत्री की कुर्सी पर काबिज थे. जग्गी की हत्या के तार सीधे तौर पर राजनीतिक साजिश से जोड़े गए थे.
सीबीआई ने अपनी जांच में तत्कालीन मुख्यमंत्री के पुत्र अमित जोगी समेत 31 लोगों को आरोपी बनाया था. हालांकि, 2007 में रायपुर की एक विशेष सीबीआई अदालत ने साक्ष्यों के अभाव का हवाला देते हुए अमित जोगी को बरी कर दिया था, जबकि 28 अन्य आरोपियों को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी.
इन दोषियों में पुलिस अधिकारी और राजनीतिक रसूख रखने वाले लोग भी शामिल थे.
इस मामले में नया मोड़ तब आया जब सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर 2025 में सीबीआई की उस अपील को स्वीकार कर लिया, जिसे पहले छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने देरी के आधार पर खारिज कर दिया था.
शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि हत्या और साजिश जैसे गंभीर आरोपों वाले मामले में तकनीकी देरी के बजाय न्याय के सिद्धांतों और मेरिट को प्राथमिकता दी जानी चाहिए. अदालत ने सीबीआई द्वारा की गई 1373 दिनों की देरी को माफ करते हुए हाईकोर्ट को निर्देश दिया कि वह अमित जोगी की दोषमुक्ति के खिलाफ दायर अपील पर नए सिरे से विचार करे.