अमेरिका ने भारत पर लगाया 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ
ट्रंप ने भारत पर कुल 50 प्रतिशत टैरिफ लगाया
दिल्ली | डेस्कः अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ़ लगा दिया है. जिससे कुल टैरिफ 50 प्रतिशत हो गया है.
नया टैरिफ़ पहले से तय 25 प्रतिशत टैरिफ़ के साथ जुड़कर लागू होगा. ट्रंप के हस्ताक्षर वाले कार्यकारी आदेश के मुताबिक़, अतिरिक्त टैरिफ़ 21 दिन बाद लागू किया जाएगा.
बुधवार को व्हाइट हाउस की तरफ़ से जारी कार्यकारी आदेश के अनुसार, भारत सरकार इस समय सीधे या परोक्ष रूप से रूसी तेल का आयात कर रही है.
इसी आधार पर अमेरिका ने भारत से आयात होने वाले सभी उत्पादों पर 25 प्रतिशत का अतिरिक्त टैरिफ़ लगाने का फ़ैसला किया है.
एग्जीक्यूटिव ऑर्डर में लिखा
भारत सरकार प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तरीके से रूस से तेल आयात कर रही है. ऐसे में अमेरिका में दाखिल होने वाले भारत के सामानों पर 25% का एक्स्ट्रा टैरिफ लागू होगा.
हालांकि कुछ खास परिस्थितियों में इस टैरिफ से छूट भी दी जाएगी जैसे कि यदि कोई सामान पहले ही समुद्र में लद चुका है और रास्ते में है या यदि वह कुछ खास तारीख से पहले अमेरिका में पहुंच चुका है.
इससे पहले मार्च 2022 में अमेरिका ने एक आदेश जारी कर रूसी तेल और उससे जुड़े उत्पादों के अपने देश में आयात पर पूरी तरह रोक लगा दी थी.
अब ट्रम्प प्रशासन ने यह पाया कि भारत उस रूसी तेल को खरीद रहा है, जिससे रूस को आर्थिक मदद मिल रही है. इस वजह से अब अमेरिका ने भारत पर यह नया टैरिफ लगाने का फैसला किया है.
कांग्रेस ने किया तंज
कांग्रेस ने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा है, नरेंद्र मोदी के दोस्त ट्रंप ने भारत पर 50% टैरिफ़ लगा दिया. ट्रंप लगातार भारत के खिलाफ कदम उठा रहे हैं, लेकिन नरेंद्र मोदी उनका नाम तक नहीं लेते.
नरेंद्र मोदी, हिम्मत कीजिए, ट्रंप को जवाब दीजिए.
अमेरिका और यूरोप का रूस के साथ व्यापार- भारत
भारत ने सोमवार को अमेरिका और यूरोपीय संघ की आलोचना करते हुए कहा था कि रूस से कच्चा तेल ख़रीदने के लिए भारत को निशाना बनाना 'अनुचित और तर्कहीन' है.
भारत के विदेश मंत्रालय ने दो टूक कहा कि अमेरिका और यूरोप खुद भी रूस के साथ व्यापार कर रहे हैं और भारत को लेकर दोहरा मापदंड अपनाया जा रहा है.
विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा था, "हमारे मामले से उलट, अमेरिका और यूरोप का रूस से व्यापार किसी 'राष्ट्रीय आवश्यकता' के तहत नहीं हो रहा है."
मंत्रालय के अनुसार, यूरोप रूस से सिर्फ़ ऊर्जा ही नहीं, बल्कि खाद, खनिज उत्पाद, केमिकल, लोहे-स्टील और मशीनरी जैसी चीज़ें भी ख़रीदता है. अमेरिका रूस से अपने परमाणु उद्योग के लिए यूरेनियम हेक्साफ़्लोराइड, इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए पैलेडियम, खाद और केमिकल आयात कर रहा है.