गैंगस्टर अमन साव मारा गया
रांची/रायपुर | संवाददाता: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से झारखंड ले कर जा रही पुलिस ने गैंगस्टर अमन साव को मार गिराया है. पुलिस ने दावा किया कि गाड़ी पलटने के बाद वह पुलिस का हथियार लेकर भागने लगा, जिसके कारण उस पर गोली चलाई गई और वह मारा गया.
अमन साव को एक दिन पहले ही रायपुर की अदालत ने झारखंड ले जाने की इजाजत दी थी.
माना जा रहा था कि रायपुर जेल में रहने के बाद भी वह यहीं से अपने गैंग को ऑपरेट कर रहा था. इस दौरान हाल ही में रांची में एक व्यवसायी पर गोली चलाई गई थी.
पुलिस के अनुसार रांची के बरियातू इलाके में 7 मार्च को कोयला कारोबारी बिपिन मिश्रा की कार पर गोलीबारी की गई थी.आरोप है कि यह काम अमन साव के इशारे पर ही किया गया था.
झारखंड की जेल में बंद अमन साहू को 2023-24 में छत्तीसगढ़ लाने के लिए चार बार वारंट जारी किया गया था. लेकिन हर बार वारंट जारी होते ही उसका जेल बदल जाता था.
पांचवीं बार उसे पिछले साल अगस्त में प्रोडक्शन वारंट पर छत्तीसगढ़ लाया गया, जहां उसे रायपुर जेल में रखा गया था.
असल में झारखंड में रंगदारी टैक्स वसूलने के लिए एके-47 के साथ चलने वाला, बेहद पतला-दुबला, 12वीं पास, मोबाइल दुकान चलाने वाला अमन साहू 17 साल की उम्र में ही रंगदारी वसूलने लगा था. झारखंड समेत अलग-अलग राज्यों में उसके ख़िलाफ़ 50 से अधिक मामले दर्ज थे.
अमन साहू को 2019 में गिरफ्तार किया गया था. लेकिन 29 सितंबर 2019 को वह हिरासत से फरार हो गया. लगभग तीन साल बाद, पुलिस ने उसे जुलाई 2022 में दोबारा गिरफ्तार किया. तब से वह झारखंड की जेल में था.
पुलिस का दावा था कि वह जेल से ही अपने गैंग को ऑपरेट करता है. आरोप है कि वह राजस्थान के अनूपगढ़ जिले की नई मंडी थाना क्षेत्र के जीडीए पुरानी मंडी घड़साना के रहने वाले सुनील कुमार मीणा ऊर्फ मयंक सिंह के सहयोग से लारेंस विश्नोई से जुड़ा हुआ था. विश्नोई भी जेल में है.
पिछले साल जुलाई में छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में दिन दहाड़े बड़े कारोबारी प्रह्लाद अग्रवाल की गाड़ी पर गोली चलाई गई थी.
आरोप था कि लॉरेंस बिश्नोई और अमन साहू गैंग ने यह हमला करवाया है. इसी गैंग से जुड़े मयंक सिंह ने दो महीने पहले धमकी दी थी और कारोबारियों को चेतावनी दी थी कि बोर्ड ऑफ डायरेक्ट, टीम एंड फैमिली से बहुत जल्द एक आदमी कम कर दूँगा.
बाद में मयंक सिंह ने इस हमले की ज़िम्मेवारी लेते हुए एक मेल भी भेजा. इसके बाद अमन साव को झारखंड जेल से छत्तीसगढ़ लाया गया था.