झारखंड में AI-आधारित 'हाथी अलर्ट सिस्टम' की शुरुआत
रांची । डेस्क: झारखंड छत्तीसगढ़ की सीमा से लगे क्षेत्रों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित 'हाथी अलर्ट सिस्टम' शुरू करने की तैयारी में है. अधिकारियों के अनुसार, राज्य का पहला एआई-आधारित कैमरा हूटर्स सिस्टम जमशेदपुर वन मंडल के चाकुलिया रेंज के अंतर्गत राजाबासा गांव के पास पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लगाया जाएगा.
मंडल वन अधिकारी साबा आलम अंसारी ने बताया कि यह झारखंड का पहला ऐसा एआई-संचालित हूटर्स सिस्टम होगा, जो स्वचालित रूप से किसी क्षेत्र में हाथियों के प्रवेश का पता लगाकर गांवों को हूटर बजाकर अलर्ट करेगा. उन्होंने कहा, "जैसे ही हाथी एआई-आधारित कैमरों की दृश्यता सीमा में प्रवेश करेगा, हूटर स्वतः बज जाएगा, जिससे ग्रामीण अपने परिवार और पशुओं की सुरक्षा के लिए सतर्क हो सकेंगे." यह प्रोजेक्ट छत्तीसगढ़ के समान है और राज्य में पहली बार लागू हो रहा है.
डीएफओ ने आगे बताया कि पूरा सिस्टम सोलर-पावर्ड है और बिजली कटौती के दौरान भी लैपटॉप या मोबाइल ऐप के माध्यम से रीयल-टाइम मॉनिटरिंग की जा सकती है. वर्तमान में गांव को चारों ओर से कवर करने के लिए पांच कैमरे लगाए जाएंगे. उन्होंने कहा, "इस प्रोजेक्ट की सफलता पर इसे घाटशिला, पोटका और बोदाम रेंज सहित अन्य हाथी प्रभावित क्षेत्रों में विस्तारित किया जाएगा." यह सिस्टम न केवल जान-माल की क्षति को कम करेगा, बल्कि झारखंड में मानव-हाथी सह-अस्तित्व सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगा.
ग्रामीणों को अलर्ट देने के अलावा, वन विभाग की टीमों को भी सतर्क रहने के लिए संदेश मिलेगा. प्राधिकृत वन अधिकारी सिस्टम को दूर से नियंत्रित भी कर सकेंगे. अंसारी ने स्पष्ट किया, "ये एआई-आधारित कैमरे केवल हाथी या हाथियों के झुंड को पहचानकर ही हूटर बजाएंगे, अन्य जानवरों या इंसानों को नजरअंदाज कर देंगे."
वन विभाग के सूत्रों के अनुसार, हूटर सिस्टम दो चरणों में अलर्ट देगा. पहले चरण में, जब हाथी चार किलोमीटर दूर होंगे, तो 20 सेकंड के लिए सायरन बजेगा. दूसरे चरण में, जब वे दो किलोमीटर के दायरे में पहुंचेंगे, तो 40 सेकंड के लिए तेज सायरन बजेगा, ताकि ग्रामीण सुरक्षित स्थान पर पहुंच सकें.
उल्लेखनीय है कि झारखंड के कोल्हान क्षेत्र के चाकुलिया वन रेंज हाथी प्रभावित क्षेत्र है, जहां सामान्यतः 15-20 हाथी रहते हैं, जो कभी-कभी पड़ोसी पश्चिम बंगाल से आने वाले हाथियों के कारण 35-40 तक पहुंच जाते हैं. इस क्षेत्र में मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं आम हैं, जिससे जानगनी की काफी हानि होती है.
इसी क्रम में, दक्षिण पूर्वी रेलवे के चक्रधरपुर मंडल में भी हाथियों के बार-बार आने के कारण एआई-आधारित 'हाथी इंट्रूजन डिटेक्शन सिस्टम' जल्द लगाया जाएगा, ताकि तेज रफ्तार ट्रेनों से हाथियों की मौत रोकी जा सके. हाल ही में बरबंबू-चक्रधरपुर-लोटापहाड़ खंड में इसका सफल परीक्षण किया गया. यह सिस्टम रेल पटरी के आसपास हाथियों की मौजूदगी का पता लगाकर लोको पायलटों को समय पर सूचित करेगा, जिससे वे ट्रेन की गति कम कर सकें.
यह सिस्टम फाइबर ऑप्टिक्स और सेंसर के माध्यम से काम करेगा. कोल्हान क्षेत्र में जहां हाथी नियमित रूप से रेल पटरी पार करते हैं और कई बार ट्रेनों से टकराकर मर जाते हैं, वहां यह कदम बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा.